जब हम "चुनाव" शब्द सुनते हैं तो अक्सर यही सोचते हैं कि बस मतदान करने के लिए लाइन में खड़े हों। लेकिन इसके पीछे एक बड़ा सिस्टम है – चुनाव आयोग. यह वह संस्था या प्रक्रिया है जो चुनावों की तैयारी, निगरानी और निष्पादन को सही दिशा देती है. आप शायद नहीं जानते, पर इसका असर सीधे आपके वोट तक पहुँचता है.
सबसे पहले तो समझें कि यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि कई ज़िम्मेदारियों का समूह है:
इन सब कामों को करने वाला मुख्य भाग है निर्वाचन आयोग, लेकिन अक्सर राज्य‑स्तरीय एजेंसियों और तकनीकी कंपनियों की भी मदद ली जाती है. इसलिए जब आप "चुनाव आयोग" सुनते हैं तो याद रखें, यह एक पूरा इकोसिस्टम है जो लोकतंत्र को चलाता है.
2024 में एक बड़ी खबर आई – 1988 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया. उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक है और इस दौरान दो संसद, दो राज्य सभा और कई विधानसभा चुनाव देखे जाएंगे. यह चयन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कोर्ट में भी इसपर बहस हुई थी – क्या यह नियुक्ति संविधानिक नियमों के तहत सही है? सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक फैसला नहीं सुनाया, लेकिन यह मामला दिखाता है कि "चुनाव आयोग" का हर कदम कितनी बारीकी से देखी जाती है.
ज्ञानेश कुमार की प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं:
यदि आप इन बदलावों का असर अपने मतदान अनुभव में देखना चाहते हैं, तो अगले चुनाव में वोटिंग केंद्र पर नई तकनीक या बेहतर सुरक्षा इंतजाम देख सकते हैं.
अब बात करते हैं कि ये जानकारी आपके लिए क्यों जरूरी है. जब आप जानते हैं कि "चुनाव आयोग" क्या करता है और कौन इसे चलाता है, तो आप अपने अधिकारों को सही से समझ पाते हैं – जैसे नामांकन की अंतिम तिथि, वोटिंग मशीन का प्रकार, या चुनाव के दौरान रिपोर्ट करने वाले हेल्पलाइन नंबर.
अंत में, याद रखें: लोकतंत्र सिर्फ़ वोट डालने तक सीमित नहीं है, यह प्रक्रिया को समझकर ही मजबूत होता है. अगर आप चाहते हैं कि आपका वोट सही मायने रखे, तो "चुनाव आयोग" के अपडेट्स पर नज़र रखें और स्थानीय निर्वाचन कार्यालय से सीधे जानकारी लें.
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और भाजपा पर महादेवपुरा, कर्नाटक में संगठित वोट चोरी का आरोप लगाया। उन्होंने पांच तरीकों की सूची बताई, जिनमें डुप्लिकेट वोटर, फर्जी पते, एक जगह कई वोटर जैसी बातें शामिल थीं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को निराधार बताया और सबूत की मांग की। भाजपा ने भी कांग्रेस से प्रमाण पेश करने को कहा।
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने महाराष्ट्र में चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है, जिसके पीछे कानूनी और प्रशासनिक मुद्दे बताए जा रहे हैं। आयोग मार्च 13 तक विभिन्न राज्यों का चुनावी मूल्यांकन कर रहा है और आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए राज्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ नियमित बैठक कर रहा है।
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