सेबी यानी सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया, भारतीय शेयर बाज़ार का मुख्य नियामक है। यह संस्थान कंपनी के लिस्टिंग, ट्रेडिंग और निवेशकों की सुरक्षा पर नज़र रखता है। अगर आप स्टॉक मार्केट में रुचि रखते हैं तो सेबी के नियम आपके लिए रोज़मर्रा की बात बन जाते हैं।
पिछले कुछ महीनों में सेबी ने कई अहम बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा परिवर्तन इक्विटी ट्रेडिंग में न्यूनतम प्रॉफ़िट मार्जिन को 3% तक सीमित करना था, जिससे बाजार की अस्थिरता कम हो सके। साथ ही, नई डेली लिक्विडिटी रेशियो (DLR) नियम ने छोटे‑छोटे फर्मों के लिए पूंजी आवश्यकताओं को आसान बना दिया है। इन कदमों से ट्रेडिंग का माहौल अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बन रहा है।
सेबी ने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर निवेशकों की शिक्षा भी बढ़ाई है। अब मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर मुफ्त में वेबिनार, क्विज़ और छोटे‑छोटे गाइड उपलब्ध हैं। इन संसाधनों से आप आसानी से समझ सकते हैं कि शेयर खरीदते‑बेचते कौन‑से जोखिम होते हैं और उन्हें कैसे संभालें।
अगर आप सेबी के नियमों को सही ढंग से अपनाते हैं तो आपके निवेश की सुरक्षा बढ़ती है। उदाहरण के तौर पर, जब कंपनी किसी नई शेयर इश्यू की घोषणा करती है, तो सेबी की चेकलिस्ट देख कर आप जांच सकते हैं कि सभी दस्तावेज़ सही हैं या नहीं। इससे धोखाधड़ी वाले स्कैम कम होते हैं।
सेबी के ‘इंसाइडर ट्रेडिंग’ नियमों को समझना भी जरूरी है। अगर किसी कंपनी में अंदरूनी जानकारी का दुरुपयोग होता है, तो सेबी तुरंत कार्रवाई करती है और जुर्माना लगाती है। इसका मतलब यह है कि आपका निवेश अधिक सुरक्षित रहेगा और बाजार में भरोसा बना रहेगा।
एक और आसान तरीका है – ‘डिस्क्लोजर फॉर्म’ को पढ़ना। हर कंपनी को अपने वित्तीय आँकड़े, जोखिम कारक और भविष्य की योजना सेबी के पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। इन फॉर्मों को पढ़कर आप किसी भी स्टॉक के बारे में सही फैसला ले सकते हैं।
सेबी का मोबाइल ऐप ‘इ-डिस्क्लोजर’ आपको रियल‑टाइम अलर्ट देता है जब कोई कंपनी नई जानकारी जारी करती है। इसे ऑन कर लें और हर अपडेट तुरंत देखें, ताकि आप मार्केट की चाल से पीछे न रहें।
सारांश में, सेबी केवल एक नियामक नहीं, बल्कि आपके निवेश का साथी भी बन सकता है। उसकी नियमावली को समझें, उपलब्ध टूल्स का इस्तेमाल करें और अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखें। इससे ना सिर्फ आपका जोखिम घटेगा, बल्कि बेहतर रिटर्न की संभावना भी बढ़ेगी।
हिडनबर्ग रिसर्च ने सेबी की चेयरपर्सन मधाबी पुरी बुच और उनके पति पर अप्रचलित ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी होने का आरोप लगाया है। इन फंड्स का उपयोग आदानी घोटाले में हुआ था। यह आरोप मधाबी द्वारा सेबी के प्रमुख के रूप में 'रुचि की कमी' दर्शाने के आरोप के बाद आया है।
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