ट्रेन यात्रा करते समय कई बार लोग छोटी‑छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन वही लापरवाही कभी‑कभी बड़े हादसे का कारण बन जाती है। इस लेख में हम सरल और असरदार तरीकों से बतायेंगे कि कैसे आप खुद भी सुरक्षित रह सकते हैं और दूसरों की मदद भी कर सकते हैं।
पहले तो प्लेटफ़ॉर्म पर खड़े होने का सही तरीका याद रखें – हमेशा किनारे से दो‑तीन मीटर दूर, लेन के बीच में नहीं। ट्रेन आने पर प्लेटफ़ॉर्म की लाइन मार्किंग या पीली लाइट देखना ज़रूरी है; ये संकेत बताता है कि कब कूदना सुरक्षित है। अगर आप बच्चों या बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे हैं तो हाथ पकड़ें और उन्हें भी यही समझाएँ।
टिकट पर ध्यान देना भी एक छोटा लेकिन असरदार कदम है। अपना टिकट हमेशा पास रखें, क्योंकि कभी‑कभी अधिकारी बिना टिकेट वाले यात्रियों को प्लेटफ़ॉर्म से बाहर भेज देते हैं, जिससे घबराहट में झटके लग सकते हैं। अगर आप मोबाइल के साथ यात्रा कर रहे हैं तो वॉल्यूम कम रखें – आवाज़ तेज़ करने से आसपास की जानकारी छूट सकती है।
अगर ट्रेन अचानक रुक जाए या अटक जाए, सबसे पहले शांत रहें और लाउडस्पीकर पर सुनें कि स्टाफ़ कौन सी निर्देश दे रहा है। आपातकालीन अलार्म बटन का इस्तेमाल तभी करें जब वास्तविक खतरा हो – जैसे आग लगना या किसी को चोट लगना। बटनों के नीचे आमतौर पर छोटा लाल रंग का लेबल होता है, उसे दबाने से तुरंत मदद की टीम को सूचना मिलती है।
अगर कोई व्यक्ति प्लेटफ़ॉर्म पर गिर गया या फँस गया तो खुद आगे नहीं बढ़ें; पहले स्टेशन स्टाफ़ को बुलाएँ या पास के पुलिस काउंटर में रिपोर्ट दें। एक छोटी‑सी सीटी या सायरन बजाने से भी आसपास के लोग मदद करने आते हैं, लेकिन ध्वनि बहुत तेज़ न हो ताकि पैनिक ना फैल सके।
सुरक्षा नियमों का पालन सिर्फ खुद की रक्षा नहीं करता, बल्कि पूरे समाज को सुरक्षित बनाता है। जब आप अपने बच्चे को ट्रेन में बैठाते हैं तो उन्हें सीट बेल्ट या फोल्डिंग सीट की तरह किसी भी प्रकार के सहारे न दें – ये अक्सर उल्टा असर कर सकते हैं।
रेलवे स्टेशनों पर लगे CCTV कैमरों और सुरक्षा गार्डों का काम याद रखें। अगर आपको कोई अजीब संकट दिखे, तो तुरंत “रिपोर्ट” बटन या स्टेशन के हेल्पलाइन पर कॉल करके सूचना दें। यह छोटा कदम बड़े हादसे को रोक सकता है।अंत में, यात्रा से पहले मौसम की जानकारी जरूर चेक करें। बारिश या धूप में ट्रैक बदलते हैं और ट्रेन की रफ़्तार भी प्रभावित होती है। यदि मौसम ख़राब हो तो देर न करके प्लेटफ़ॉर्म पर देर तक इंतजार न करें; वैकल्पिक रास्ते खोजें या अगले ट्रैन के समय को देखें।
सुरक्षा का ध्यान रखने से आपकी यात्रा आरामदायक और तनाव‑मुक्त बनती है। इन छोटे‑छोटे नियमों को रोज़मर्रा की आदत में बदल दें, फिर देखेंगे कि ट्रेन में बैठना अब डराने वाला नहीं रहा। सुरक्षित सफर के लिए हमेशा तैयार रहें – यही सबसे बड़ा ट्रैक्शन है!
18 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले में एक गंभीर ट्रेन दुर्घटना हुई, जब डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की 15 बोगियां पटरी से उतर गईं। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और लगभग 25 लोग घायल हो गए। राहत कार्य तुरंत शुरू किया गया और रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। दुर्घटना के बाद रेलवे सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर विशेष ध्यान देने की मांग उठी है।
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