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पितृ दोष: क्या है ये ज्योतिषीय अवधारणा और इसका जीवन पर क्या असर होता है

जब कोई व्यक्ति अपने पिता या पूर्वजों के साथ अनुचित व्यवहार करता है, या उनकी यादों को नज़रअंदाज़ कर देता है, तो ज्योतिष के अनुसार इसका नतीजा पितृ दोष, एक ज्योतिषीय बाधा जो पितृ पुरुषों के कर्मों और उनके प्रति आपके व्यवहार से जुड़ी होती है के रूप में दिखाई देता है। ये दोष सिर्फ़ एक धारणा नहीं, बल्कि एक ऐसा ऊर्जा संक्रमण है जो आपके परिवार के अतीत से आपके वर्तमान तक पहुँच जाता है। इसे पितृ श्राप, पूर्वजों के असंतुष्टि का आध्यात्मिक प्रभाव भी कहते हैं, जो बिना कारण नौकरी छूटने, धन की कमी, या विवाह में देरी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

ये दोष किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक बोझ हो सकता है। जब कोई पिता अपने पिता के साथ अन्याय करता है, या पितृ पूजा को नज़रअंदाज़ कर देता है, तो ये ऊर्जा अगली पीढ़ी में बहती है। कर्म सिद्धांत, कार्य और उसके परिणाम का अनिवार्य संबंध इसका आधार है। ये नहीं कि आपके पिता के कर्म आपको दंड देते हैं, बल्कि आपकी अपनी नज़रों में उनके प्रति भावनाएँ आपके भाग्य को आकार देती हैं। इसीलिए ज्योतिष में ये दोष देखा जाता है तब जब आपके जन्म कुंडली में शनि, मंगल या चंद्रमा का स्थान अशुभ होता है, और पितृ भाव (9वां भाव) कमज़ोर होता है।

क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ भी स्थिर नहीं बन पाता? या आपके विवाह के बाद भी धन की कमी बनी रहती है? ये सब कुछ संभवतः पितृ दोष के कारण हो सकता है। इसका इलाज सिर्फ़ गायत्री मंत्र या पूजा से नहीं, बल्कि अपने पितृ पुरुषों के प्रति अपनी भावनाओं को बदलकर होता है। उनके नाम का जाप करना, उनकी याद में दान करना, या उनके लिए श्राद्ध करना — ये सब बाहरी कार्य हैं। असली बदलाव तब होता है जब आप उनके लिए अपने दिल में शांति लाते हैं।

इस पेज पर आपको ऐसे ही वास्तविक कहानियाँ, ज्योतिषीय विश्लेषण, और व्यावहारिक समाधान मिलेंगे जो पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। कुछ लोगों ने इसे अपने घर की आय बढ़ाने के लिए, कुछ ने विवाह के लिए, और कुछ ने बच्चों के जन्म के लिए उपयोग किया है। ये सभी अनुभव आपके लिए एक रास्ता बन सकते हैं।

मार्गशीर्ष अमावस्या 2025: 19-20 नवंबर को पितृ पूजा और तिल तर्पण का शुभ समय
  • नव॰ 20, 2025
  • के द्वारा प्रकाशित किया गया Divya B

मार्गशीर्ष अमावस्या 2025: 19-20 नवंबर को पितृ पूजा और तिल तर्पण का शुभ समय

मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 19-20 नवंबर को आयोजित होगी, जिस पर पितृ पूजा, तिल तर्पण और ब्राह्मण भोजन से पूर्वजों को शांति मिलती है। यह दिन पितृ दोष वालों के लिए विशेष रूप से शुभ है।

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