आपने शायद टीवी पर या सोशल मीडिया में कई खिलाड़ियों को ‘रिटायरमेंट’ के बैनर तले देखी होगी। चाहे वो भारत का उभरता स्टार हो या विदेशों का अनुभवी बल्लेबाज़, सभी ने एक समय तय किया कि अब मैदान से दूर जाना है। तो चलिए जानते हैं कौन‑कौन से खिलाड़ी अभी-अभी सन्क्षेप कर रहे हैं और क्यों?
पिछले महीने हर्शित राणा ने अपनी T20I डेब्यू की ही शुरुआत में विवादास्पद कंसशन‑सबस्टिट्यूशन पर चर्चा शुरू करवाई। इसके बाद उसने बताया कि शारीरिक थकान और लगातार यात्रा करने की परेशानी ने उसे रिटायरमेंट का विचार किया। इसी तरह बाबर आज़म को भी आईपीएल में चयन न मिलने के कारण अपनी अंतरराष्ट्रीय करियर से अलविदा कहा गया, क्योंकि उनका फॉर्म गिर रहा था और टीम मैनेजमेंट ने भरोसा नहीं दिखाया।
इन दो उदाहरणों से पता चलता है कि रिटायरमेंट सिर्फ उम्र का सवाल नहीं है, बल्कि लगातार प्रदर्शन, फिटनेस और टीम में स्थान की स्थिरता भी बड़ी भूमिका निभाती है।
1. शारीरिक थकान – लंबी सीजन, लगातार ट्रैवल और भारी प्रैक्टिस सत्र शरीर पर असर डालते हैं। कई खिलाड़ी चोटों से बचने या पुनर्वास की जरूरत को लेकर रिटायरमेंट चुनते हैं।
2. मानसिक दबाव – सोशल मीडिया पर हर चाल का विश्लेषण, दर्शकों की उम्मीदें और लगातार जीत की चाह़ एक तनावभरा माहौल बनाती है। जब खिलाड़ी इस दबाव को संभाल नहीं पाते तो वे पीछे हटते हैं।
3. टीम में जगह – नए युवा खिलाड़ियों के उभरने से पुराने खिलाड़ियों का रोल कम हो जाता है। अगर कोचिंग स्टाफ या चयन समिति उन्हें नहीं देखती, तो उनका करियर स्वाभाविक रूप से समाप्त होता है।
4. वित्तीय स्थिरता – कई बार खिलाड़ी अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए निवेश या व्यवसाय में हाथ आज़माते हैं और खेल को कम प्राथमिकता देते हैं।
5. परिवारिक कारण – बच्चों की परवरिश, माता‑पिता की देखभाल आदि व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के कारण भी खिलाड़ी रिटायरमेंट ले लेते हैं।
इन सभी कारकों का मिश्रण अक्सर निर्णय को प्रभावित करता है। कोई एक ही वजह नहीं देता, बल्कि कई छोटी‑छोटी बातों का संकलन होता है।
रिटायरमेंट का मतलब खेल से पूरी तरह दूर हो जाना नहीं है। बहुत सारे क्रिकेटरों ने कोचिंग, टिप्पणीकार या टीम मैनेजर की भूमिका ली है। विराट कोहली ने अपने अकादमी में युवा टैलेंट को ट्रेन करने का वादा किया था। इसी तरह सचिन तेंदुलकर अपनी बीमा कंपनी चलाते हैं और सामाजिक कार्यों में जुड़े हुए हैं।
यदि आप एक क्रिकेट फैन हैं, तो रिटायरमेंट के बाद भी इन खिलाड़ियों की नई पहल को देख सकते हैं। उनका अनुभव नए पीढ़ी तक पहुँचता है और खेल का विकास होता रहता है।
समापन में कहें तो, क्रिकेट सन्क्षेप सिर्फ समाप्ति नहीं, बल्कि एक नया चरण शुरू करने का अवसर है। चाहे वह कोचिंग हो, बिजनेस या सामाजिक काम – हर खिलाड़ी अपनी कहानी का अगला पन्ना लिखता है। आप भी अपने पसंदीदा खिलाड़ी के अगले कदमों पर नजर रखें, क्योंकि उनका सफ़र अभी खत्म नहीं हुआ है।
जेम्स एंडरसन, प्रसिद्ध इंग्लिश क्रिकेटर, 22 साल की उल्लेखनीय करियर के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेंगे। एंडरसन, जिन्होंने 700 से अधिक टेस्ट विकेट लिए हैं, अपने अंतिम टेस्ट मैच वेस्ट इंडीज के खिलाफ लॉर्ड्स में खेलेंगे। एंडरसन इंग्लैंड के सर्वकालिक प्रमुख टेस्ट विकेट-टेकर हैं। संन्यास के बाद एंडरसन इंग्लैंड के रेड-बॉल स्क्वाड के लिए फास्ट बॉलिंग मेंटर के रूप में समर्थन देंगे।
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