अगर आपने कभी शेयर बाजार या अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बारे में बात सुनी है तो जॉर्ज सोरोस का नाम जरूर सुनाया होगा। वह एक हंगेरी मूल के अमेरिकी निवेशक हैं, जिन्होंने 1970‑80 के दशकों में अपना ‘कोर्सेट फंड’ चलाकर करोड़ों कमाए। लेकिन सिर्फ पैसा कमाने से ज़्यादा उनका दान कार्य और राजनीतिक योगदान लोगों की नज़र को खींचता है। इस लेख में हम उनके जीवन के प्रमुख पहलुओं को सरल शब्दों में समझेंगे, ताकि आप भी जान सकें कि वह क्यों अक्सर समाचार में आते हैं।
सोरोस ने अपनी निवेश रणनीति को ‘रिफ्लेक्टिविटी थ्योरी’ कहा है। उनका मानना है कि बाजार में लोग अपने ही उम्मीदों से कीमतें बनाते हैं, इसलिए भावनाओं को समझना ज़रूरी है। साधारण तौर पर इसका मतलब है: जब भी कोई शेयर बहुत अधिक लोकप्रिय हो रहा हो, तो उसका मूल्य अस्थायी रूप से बढ़ा सकता है और गिरावट का जोखिम रहता है। सोरोस अक्सर इस उल्टा सोच के आधार पर बड़े बेट लगाते हैं—जैसे 1992 में ब्रिटेन की पाउंड को शॉर्ट करना, जिससे उन्होंने एक दिन में अरबों कमाए।
निवेश के साथ-साथ सोरोस ने ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन’ के जरिये विश्व भर में शिक्षा, मानवाधिकार और लोकतंत्र को समर्थन दिया है। भारत में भी उन्होंने कई NGOs को ग्रांट दी हैं, जो शैक्षिक सुधार और सामाजिक न्याय पर काम करती हैं। लेकिन यही दान कार्य उन्हें कई देशों में आलोचना का कारण बनता है। कुछ सरकारें कहते हैं कि उनका फंड राजनीतिक एजेंडा को प्रभावित करता है, जबकि उनके समर्थक दावा करते हैं कि यह स्वतंत्र विचारों की रक्षा के लिए आवश्यक है। इस तरह के बहस अक्सर मीडिया हेडलाइन्स में दिखते हैं और सोरोस के नाम को विवादित बनाते हैं।
तो अगर आप निवेश या सामाजिक बदलाव में रुचि रखते हैं, तो सोरोस से सीखने के कई पहलू हैं। उनके जोखिम प्रबंधन के सिद्धांत आपको बाजार की अटकलों में सतर्क बना सकते हैं, और उनका दान मॉडल दिखाता है कि पैसा कैसे बड़े स्तर पर सकारात्मक असर डाल सकता है। लेकिन यह भी याद रखें कि हर बड़ी सफलता के साथ सवाल और आलोचना आती है—यह एक सामान्य प्रक्रिया है।
अंत में, जॉर्ज सोरोस का जीवन हमें बताता है कि व्यक्तिगत विचारधारा, वित्तीय कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी आपस में जुड़े हो सकते हैं। चाहे आप निवेशक हों या समाजसेवी, उनके अनुभवों को पढ़कर अपने रास्ते के बारे में नई दिशा पा सकते हैं।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने एक कार्यक्रम में पूछा गया कि यदि उन्हें उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन या दानकर्ता जॉर्ज सोरोस के साथ डिनर करना हो, तो वे किसे चुनेंगे। जयशंकर ने चतुराई से उत्तर दिया व्यक्त करते हुए कहा, "मैं नवरात्रि का उपवास कर रहा हूँ," जिससे उन्होंने इस विवादास्पद प्रश्न से बचने की कुशलता दिखाई।
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