Wimbledon 2025 में पहले दौर का सबसे बड़ा झटका
रिपोर्ट: दिव्या बी
लंदन की घास पर देर जून की शाम, दर्शकों को उम्मीद थी कि पूर्व विश्व नंबर-1 और यूएस ओपन चैंपियन दानिल मेदवेदेव सहज जीत के साथ आगे बढ़ेंगे। हुआ उल्टा. फ्रांस के बेंजामिन बॉन्ज़ी ने चार सेट में मेदवेदेव को हराकर पहले ही दौर में बाहर का रास्ता दिखा दिया। ड्रॉ में दिग्गज माने जा रहे मेदवेदेव का रिदम शुरू से टूटता-सा दिखा, और बॉन्ज़ी ने उस एक मौके को लगातार दबाव में बदल दिया।
बॉन्ज़ी का यह सीजन टूर-लेवल पर बहुत चकाचौंध वाला नहीं था। लेकिन घास पर उनके कॉम्पैक्ट स्ट्रोक्स, सीधी रेखाओं में गेंद की तेज रफ्तार, और मौके पर नेट पर आकर पॉइंट खत्म करने की हिम्मत—इन सबने मेदवेदेव की लंबी रैलियों वाली टेम्पो को बिगाड़ दिया। मेदवेदेव ने सर्विस गेम्स में एक-दो ढीली शुरुआत की, और वहीं से मैच की दिशा बदलती गई।

मैच कैसे फिसला, और सीजन पर इसका असर
मेदवेदेव की ताकत डीप रिटर्न पोजिशन और बेसलाइन से फ्लैट, कंट्रोल्ड हिटिंग रही है। घास पर गेंद की स्किडिंग और नीचा उछाल उनके रिटर्न को अक्सर छोटा कर देता है, जिससे सामने वाला खिलाड़ी पहली ही स्ट्राइक में आक्रामक हो सकता है। बॉन्ज़ी ने ठीक यही किया—शॉर्ट बैकस्विंग, तेज फोरहैंड, और कोनों पर पिन-पॉइंट लेंथ। नतीजा: मेदवेदेव को बार-बार पोजिशन बदले बिना विकल्प नहीं दिखा, और अनफ़ोर्स्ड एरर्स बढ़ते गए।
कहानी कुछ ऐसे पल भी लिखती है जहाँ मैच की धड़कन तेज हुई—लंबे-लंबे ड्यूस गेम, ब्रेक पॉइंट्स का दबाव, और छोटे-छोटे रैलियों में फैसले। वहां बॉन्ज़ी की बॉडी लैंग्वेज हल्की-सी आगे झुकी, शॉट से पहले कदम तेज हुए, जबकि मेदवेदेव की टाइमिंग बार-बार पीछे छूटती दिखी। घास पर धीमी शुरुआत की कीमत कई बार पूरी शाम चुकानी पड़ती है, और यहीं रूसी स्टार पीछे रह गए।
यह हार अकेली घटना नहीं रही। 2025 के पूरे ग्रैंड स्लैम सीजन में मेदवेदेव का ग्राफ नीचे गया—चारों मेजर मिलाकर वे सिर्फ एक मैच जीत पाए। यही नहीं, अगस्त के यूएस ओपन में भी बॉन्ज़ी ने उन्हें फिर हराया। लगातार दो मेजर में एक ही खिलाड़ी से हारना मानसिक और टैक्टिकल—दोनों स्तर पर सवाल खड़े करता है। क्या रिटर्न पोजिशन बहुत पीछे है? क्या सर्विस पैटर्न अनुमान योग्य हो गए हैं? क्या बड़े पलों पर शॉट-सेलेक्शन बदलना चाहिए?
मेदवेदेव के लिए अगला कदम हार्ड-कोर्ट स्विंग में रीसेट करना होगा। घास पर जहां स्लिप और लो-बाउंस उनकी रिदम को काटते हैं, वहीं हार्ड कोर्ट पर उनकी फ्लैट हिटिंग और काउंटर-पंचिंग अक्सर जानलेवा हथियार बनते हैं। टीम को टारगेटेड ड्रिल्स—पहली सर्व पर बॉडी-सर्व की आवृत्ति, सेकंड-सर्व पर आक्रामक रिटर्न, और छोटे पॉइंट्स बनाने की आदत—पर लौटना होगा। वे जितना जल्दी शुरुआती गेम्स में “फ्री प्वाइंट्स” जुटाएंगे, उतना ही मैच का कंट्रोल उनके पास रहेगा।
बॉन्ज़ी के लिए यह नतीजा करियर-डिफाइनिंग रहा। टूर पर उनका प्रोफाइल “मजबूत, पर सीमित टूर्नामेंट जीत” जैसा था। लेकिन ऐसी जीतें खिलाड़ियों का माइंडसेट बदलती हैं। बड़े कोर्ट पर, बड़े नाम के खिलाफ, बड़े पल में शॉट पूरा करना—यही वह चिंगारी है जो अगले राउंड्स में साहस पैदा करती है। रैंकिंग में बढ़त जितनी अहम नहीं, उससे ज्यादा अहम है भरोसा कि “मैं यह कर सकता हूं।”
घास पर उलटफेर कोई नई बात नहीं। इस सतह पर पॉइंट छोटे होते हैं, मार्जिन कम होता है, और एक खराब सर्विस गेम पूरे सेट को पलट देता है। यही कारण है कि शुरुआती दौरों में, खासकर पहले-दूसरे मैच में, शीर्ष खिलाड़ी भी फिसल जाते हैं। बॉन्ज़ी ने उस खिड़की को पहचाना और पूरी सख्ती से फायदा उठाया—गेंद को जल्दी लिया, क्रॉस-कोर्ट से अचानक डाउन-द-लाइन मोड़ा, और मेदवेदेव को “प्लान बी” खोजने पर मजबूर किया।
इस हार का व्यापक संकेत यही है कि 2025 में मेदवेदेव का “बड़े मंच पर भरोसा” डगमगाया है। ऐसे में कोचिंग टीम अक्सर दो चीजें करती है—कठिन मैच सिचुएशंस की रिहर्सल और हाई-प्रेशर सर्व/रिटर्न पैटर्न का पुनर्निर्माण। क्योंकि ग्रैंड स्लैम जीतने के लिए सिर्फ शॉट-क्वालिटी नहीं, पल-पल का निर्णय भी जीतना पड़ता है।
जहां तक बॉन्ज़ी की बात है, उनके लिए अब चुनौती है कि इस स्टेटमेंट-विन को सीरीज में बदला जाए। अगली बार जब सामने कोई टॉप सीड होगा, तो विपक्षी टीम उन्हें अब “डार्क हॉर्स” नहीं, एक स्पष्ट खतरे के रूप में पढ़ेगी। यह सम्मान जितना अच्छा है, उतना ही कठिन—क्योंकि अब हर मैच में उनसे वही तीखी शुरुआत, वही सटीकता और वही मानसिक मजबूती की उम्मीद होगी।