काम करने वाले हर आदमी को अपने मेहनत का सही मुआवजा चाहिए. कई बार देर या बिलकुल न मिलने से तनाव बढ़ जाता है. सबसे पहले, शांति रखें और यह देखें कि देरी का कारण क्या है – कंपनी की वित्तीय समस्या, दस्तावेज़ी गलती या किसी नियम‑भंग के कारण.
अगर आपको पता चल गया कि वजह सिर्फ कागज़ी चूक है, तो तुरंत एचआर को लिखित रूप में याद दिलाएँ. ई‑मेल या व्हाट्सएप पर संदेश भेजें और उसमे तारीख, बकाया राशि और भुगतान की मांग स्पष्ट करें. ऐसा करने से आपके पास बाद में सबूत रहेगा.
यदि दो‑तीन बार याद दिलाने के बाद भी वेतन नहीं आया, तो आगे का कदम उठाना चाहिए. सबसे पहले, अपने कंपनी की आंतरिक grievance पॉलिसी देखें – अक्सर वहाँ एक फॉर्म या ईमेल पता दिया रहता है जहाँ आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
इसके बाद लेबर विभाग में ऑनलाइन शिकायत डालें. पोर्टल पर आपका नाम, पहचान पत्र और बकाया वेतन की राशि भरनी होगी. अगर आपके पास एचआर से मिले उत्तर या मेल की स्क्रीनशॉट है तो साथ अटैच करें. यह प्रक्रिया आमतौर पर 15‑30 दिनों के भीतर जवाब देती है.
जब लेबर विभाग भी काम नहीं करता, तो आप वकील या कानूनी सहायता फंड से संपर्क कर सकते हैं. कई बार एक साधारण कस्टमर नोटिस भेजना ही समस्या सुलझा देता है क्योंकि कंपनी को कोर्ट के खर्चे से बचना पड़ता है.
सरकारी योजना जैसे एम्प्लॉइमेंट ग्रांट स्कीम या श्रम कल्याण निधि भी उन लोगों की मदद करती हैं जिनका वेतन नहीं आया. इन फंडों के लिए आवेदन करने में आपका बकाया दस्तावेज़, पहचान प्रमाण और नौकरी का अनुबंध चाहिए.
आखिरकार, भविष्य में ऐसी समस्या से बचने के लिये कुछ आसान उपाय अपनाएँ:
वेतन न मिलने की परेशानी कई लोगों को झेलनी पड़ती है, लेकिन सही कदम उठाने से आप जल्दी समाधान पा सकते हैं. याद रखें, आपका अधिकार सुरक्षित है और इसे पाने के लिए आपको सिर्फ़ थोड़ी सी जानकारी और दृढ़ता चाहिए.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने लगातार चौथे वर्ष के लिए वेतन नहीं लिया है, जो COVID-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया प्रोटोकॉल है। यह निर्णय प्रबंधन के पारिश्रमिक में संयम और कंपनी की दीर्घकालिक वृद्धि और स्थिरता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पहले, उन्होंने अपने वार्षिक पारिश्रमिक को FY 2008-09 से FY 2019-20 तक 15 करोड़ रुपये पर सीमित रखा था।
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