क्या आपने कभी सोचा है कि कोई महिला पृथ्वी से बाहर कितनी दूर तक जा सकती है? सुनिता विलियम्स ने इस सवाल का जवाब दो बार भी दिया—और वो भी बड़े ही सहज अंदाज़ में। उनका नाम NASA के सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों में गिना जाता है, लेकिन भारतीय मूल की पहचान उन्हें और खास बनाती है।
सुनिता का जन्म ओहायो में हुआ था, पर माँ का घर कर्नाटक से था। बचपन में ही वह विज्ञान के प्रयोगों में हाथ आज़माए करती थीं—जैसे बॉलटॉप को उड़ाने की कोशिश करना या टेलीस्कोप से सितारों को देखना। हाई स्कूल में उनके गणित‑भौतिकी के अंक टॉप पर थे, इसलिए उन्हें यूएस एरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी (UT) में स्कॉलरशिप मिली। वहाँ से उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करके नेवेल अकादमी में दाखिला लिया।
नेवेल में उनकी मेहनत का फल मिला—1999 में वह पहली बार अंतरिक्ष में गई, और अब तक चार मिशन (STS‑116, STS‑121, Expedition 14, Expedition 15) को सफल बनाया है। हर बार जब वह पृथ्वी से दूर होती, तो उसका दिल भारतीय ध्वज की आवाज़ सुनता था।
सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने दो बार अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बना रखा है—अब तक 322 दिन! इस दौरान उन्होंने कई प्रयोग किए, जैसे मानव शरीर पर माइक्रोग्रैविटी के असर और नई तकनीकी उपकरणों की जांच। उनका एक खास मिशन था ‘रूटिन फिजिकल एक्टिविटीज़’ (RPE), जहाँ उन्होंने अंतरिक्ष में व्यायाम करने के नए तरीके दिखाए। यह आजकल एरोस्पेस कंपनियों को भी मदद कर रहा है कि वे लंबी दूरी के मिशनों के लिए मानव शरीर को फिट रख सकें।
सुनिता ने NASA की पहली महिला ‘जेट इंटीग्रिटी टेस्ट’ में भाग लेकर अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखने में योगदान दिया। उनका कहना था, “अगर हम खुद नहीं कर पाएँ तो कौन करेगा?” यह लाइन आज भी कई युवा इंजीनियरों के मन में गूँजती है।
परिवार की बात न छोड़ें—सुनिता ने दो बच्चों को जन्म दिया और फिर से अंतरिक्ष यात्रा पर निकल पड़ीं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि माँ बनना या करियर आगे बढ़ाना, दोनों एक साथ संभव हैं। उन्होंने कहा था, “मैं अपने बच्चों के लिए मिसाल बनना चाहती हूँ, कि सपने देखो और उन्हें पूरा करो।”
यदि आप भी अंतरिक्ष में काम करने का सपना देखते हैं तो सुनिता से सीखें: निरंतर पढ़ाई, कठिन मेहनत, और कभी हार न मानना। उनके कई इंटरव्यू में बताया गया है कि उन्होंने रोज़ 2-3 घंटे विज्ञान के लेख पढ़े, फिर फिटनेस रूटीन बनाए रखा। यही सटीक योजना आपको भी आगे ले जा सकती है।
आज की डिजिटल दुनिया में सुनिता विलियम्स का नाम सोशल मीडिया पर भी चमक रहा है। उनके इंस्टाग्राम पोस्ट में अक्सर वो अंतरिक्ष के खूबसूरत नज़ारे, अपने बच्चों की तस्वीरें और वैज्ञानिक तथ्य शेयर करती हैं। यह दिखाता है कि एक अंतरिक्ष यात्री भी रोज़मर्रा की जिंदगी जी सकता है—बस दृढ़ संकल्प चाहिए।
संक्षेप में कहें तो सुनिता विलियम्स सिर्फ एक महिला नहीं, बल्कि भारत के लिए गर्व और युवा पीढ़ी के लिये प्रेरणा हैं। उनके सफर को पढ़कर आप भी अपने लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ा सकते हैं—चाहे वह विज्ञान हो या कोई और क्षेत्र। अब आपका समय है, क्या आप तैयार हैं?
नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनिता विलियम्स और उनके साथी बट्च विलमोर को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पांच महीने से फंसे हुए देखते हुए ताजे भोजन की कमी की चिंता बढ़ रही है। जबकि उनके पास पर्याप्त भोजन है, ताजे फल और सब्जियों की कमी उनकी सेहत पर असर डालने की संभावना है। अंतरिक्ष में वजन कम होने और अन्य शारीरिक बदलावों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
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