आपने कभी ‘पुनर्मूल्यांकन’ शब्द सुना होगा, लेकिन इसका असली मतलब समझ पाते हैं? यह लेख आपको सरल भाषा में बताता है कि पुनर्मूल्यांकन क्या होता है, क्यों किया जाता है और आपके पैसे पर इसका क्या असर पड़ता है।
पुनर्मूल्यांकन शब्द दो भागों से बना है – ‘पुर्न’ यानी फिर से, और ‘मूल्यांकन’ यानी कीमत तय करना। जब कोई कंपनी या सरकार अपने खातों में दिखायी गई संपत्ति या शेयर की कीमत को नई परिस्थितियों के हिसाब से बदलती है, तो उसे पुनर्मूल्यांकित कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर एक कंपनी ने 2020 में अपनी जमीन का मूल्य ₹10 करोड़ लिखा था और आज बाजार में वही जमीन ₹15 करोड़ की हो गई, तो वह अपनी बैलेंस शीट को नई कीमत दिखाने के लिए पुनर्मूल्यांकन करेगी।
पुनर्मूल्यांकन करने के कई कारण होते हैं:
इन कारणों से कंपनियां अक्सर सालाना या बड़े बदलाव पर पुनर्मूल्यांकन करती हैं।
जब कोई बड़ी कंपनी जैसे Kotak Mahindra Bank या Sens... (उदाहरण) अपने एसेट्स को फिर से मूल्यांकित करती है, तो शेयरधारकों के पोर्टफ़ोलियो में दो तरह की चीज़ें बदल सकती हैं:
इसलिए निवेश करने से पहले आप देखिए कि कंपनी ने हाल ही में कोई पुनर्मूल्यांकन किया है या नहीं, और इसका असर उसके वित्तीय आँकड़ों पर कैसे पड़ा। यह जानकारी आमतौर पर सालाना रिपोर्ट या प्रेस रिलीज़ में मिलती है।
पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी खबरें पढ़ते समय इन बातों को याद रखें:
सही जानकारी लेकर आप अपने पोर्टफ़ोलियो को सुरक्षित रख सकते हैं और बाजार के उतार‑चढ़ाव से बचने की बेहतर रणनीति बना सकते हैं। याद रखें, पुनर्मूल्यांकन केवल एक संख्या नहीं, बल्कि कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति का संकेत है।
अब जब आप समझ गए हैं कि पुनर्मूल्यांकन क्या है और क्यों किया जाता है, तो हर बार शेयर खरीदते या बेचते समय इस बात को जरूर देखिए। इससे आपके निवेश निर्णय अधिक ठोस होंगे और भविष्य में अनावश्यक नुकसान से बचेंगे।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं कक्षा की परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए हैं। कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 93.60% है, जो पिछले साल के परिणाम से 0.48% अधिक है। लड़कियों ने एक बार फिर 94.75% उत्तीर्ण प्रतिशत के साथ लड़कों को पीछे छोड़ दिया है।
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