अगर आप शेयर मार्केट देख रहे हैं तो Nikkei 225 नाम बहुत बार सुनते होंगे. यह जपान का सबसे पुराना और लोकप्रिय स्टॉक इंडेक्स है, ठीक वैसे ही जैसे भारत में Sensex या Nifty. 225 कंपनियों के शेयरों की कीमतों को मिलाकर इसका मूल्य निकालते हैं, इसलिए इसका चलना पूरे जापानी अर्थव्यवस्था की धड़कन जैसा माना जाता है.
इंडेक्स में शामिल कंपनियां टॉप-टियर जपानी फर्में हैं – इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर. हर कंपनी का भार उसके मार्केट कैप पर निर्भर करता है, यानी बड़े बिज़नेस का असर ज्यादा होता है. जापान की टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज (TSE) ये सूची हर साल अपडेट करती है, ताकि इंडेक्स वास्तविक बाजार स्थितियों को दर्शा सके.
अगर आप सीधे Nikkei 225 देखना चाहते हैं तो Nikkei की आधिकारिक वेबसाइट या बड़े वित्तीय पोर्टल पर आसानी से मिल जाएगा. दैनिक बदलाव पॉइंट में दिखते हैं, लेकिन अक्सर प्रतिशत के रूप में भी बताया जाता है.
कई लोग सोचते हैं कि जापानी बाजार सिर्फ जपानियों तक सीमित है. असल में, जब Nikkei 225 ऊपर‑नीचे होता है तो इसका असर ग्लोबल मार्केट्स पर पड़ता है, जिसमें भारत भी शामिल है. विदेशी निवेशकों की रुचि बदलने से भारतीय कंपनियों के शेयरों में उलझन या स्थिरता आ सकती है.
उदाहरण के तौर पर जब Nikkei 225 तेज़ी से बढ़ा, तो कई विदेशी फंड्स एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र में पैसा लगा रहे थे. इससे Nifty और Sensex में भी हल्की उछाल देखी गई. वहीँ अगर जापान में गिरावट आई, तो जोखिम घटाने की वजह से पूंजी बहार निकल सकती है, जिससे हमारे बाजार पर दबाव बढ़ता है.
इसीलिए भारतीय निवेशकों को Nikkei 225 के प्रमुख आंकड़े हर महीने चेक करना फायदेमंद रहता है. इससे आप वैश्विक रुझानों का अंदाज़ा लगा सकते हैं और अपने पोर्टफ़ोलियो में सही टाइमिंग से बदलाव कर सकते हैं.
**ताज़ा डेटा (अप्रैल 2025):** Nikkei 225 ने पिछले महीने 2.1% की बढ़ोतरी दिखायी, मुख्य कारण तकनीकी कंपनियों के मजबूत क्वार्टरल रिज़ल्ट्स और अमेरिकी डॉलर में हल्की कमजोरी थी. टॉप परफॉर्मर में Toyota, Sony और SoftBank शामिल हैं.
अगर आप इस इंडेक्स को फॉलो करना चाहते हैं तो नीचे दी गई टिप्स मददगार होंगी:
समझ में आया? अब आप जानते हैं कि Nikkei 225 सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि एशिया के बड़े आर्थिक संकेतक का हिस्सा है. इसे समझकर आप अपने निवेश को और बेहतर बना सकते हैं.
जापान के Nikkei 225 इंडेक्स ने 35 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ 42,426.77 का ऐतिहासिक स्तर छू लिया। ये उछाल कमजोर येन और बढ़ती निर्यात कंपनियों के मुनाफे की वजह से आया है। अब हालांकि, 2025 में उतार-चढ़ाव दिख रहा है, जिससे वैश्विक बाजारों पर खास असर पड़ रहा है।
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