अगर आप भारत के चुनाव देखना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) का नाम सुनाई देगा. ये वही व्यक्ति होते हैं जो पूरे देश में मतदान प्रक्रिया को सही ढंग से चलाते हैं. सीईओ की ज़िम्मेदारी सिर्फ फॉर्म भरवाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर वोट सुरक्षित और भरोसेमंद रहे.
सीईओ का काम बहुत विस्तृत होता है. सबसे पहले वे निर्वाचन अधिनियमों को लागू करते हैं – यानी कौन वोट दे सकता है, कब और कैसे वोट डालना है, ये सब तय होते हैं. फिर वे मतपत्र तैयार करके हर जिले में भेजते हैं, यह देख लेते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक मशीनें ठीक से काम कर रही हैं या नहीं.
एक और अहम चीज़ है चुनावी दुरुपयोग रोकना. अगर किसी ने वोट चुराने की कोशिश की – जैसे डुप्लिकेट वोटर या फर्जी पते – तो सीईओ के पास कार्रवाई का अधिकार होता है. इस कारण ही हालिया राहुल गांधी‑भाजपा विवाद में, सीईओ ने सबूत माँगे और सभी दलीलों को जांचा.
पिछले साल कई राज्यों में चुनाव हुए और हर बार मुख्य चुनाव आयुक्त के निर्णयों पर चर्चा हुई. उदाहरण के तौर पर, महादेवपुरा (करनाटक) में वॉट चोरी की खबर सामने आई तो सीईओ ने पाँच तरीकों से इस मुद्दे को उठाया – डुप्लिकेट वोटर, फर्जी पते, एक जगह कई वोटर आदि.
इन मामलों में जनता अक्सर सवाल करती है: "क्या चुनाव सच‑मुच साफ़ है?" जवाब सरल है – प्रक्रिया खुली और पारदर्शी रखनी पड़ती है. अगर कोई गड़बड़ी दिखे तो सीईओ को तुरंत जांच करनी होती है, रिपोर्ट बनानी होती है और अदालत के सामने पेश करना होता है.
आपको भी अपने अधिकारों का ज्ञान होना चाहिए. यदि आप देखते हैं कि कहीं मतदान में अजीब बात हो रही है – जैसे लम्बी कतारें या मशीन की गड़बड़ी – तो आप स्थानीय चुनाव अधिकारी को लिख सकते हैं या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं. यह छोटा कदम बड़े बदलाव की ओर ले जाता है.
मुख्य चुनाव आयुक्त का काम कठिन है, लेकिन अगर हम सभी मिलकर जागरूक रहें तो लोकतंत्र और मजबूत बनता है. इसलिए अगले बार जब आप मतदान केंद्र पर जाएँ, तो याद रखें कि आपका वोट सुरक्षित है क्योंकि पीछे एक सीईओ टीम इसे देख रही है.
1988 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार को एक नए चयन कानून के तहत भारत का मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक है, और इसमें 20 विधानसभा चुनाव, 2029 लोकसभा चुनाव और 2027 के राष्ट्रपति चुनाव शामिल हैं। उनकी नियुक्ति का कांग्रेस द्वारा विरोध किया गया है और इसे सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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