जब भी देश में बड़ा चुनाव आता है, तो मीडिया और राजनैतिक पार्टियों से अक्सर सुनते हैं ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट’ की बात। ये एक ऐसी सेटिंग है जो सभी उम्मीदवारों और पार्टी कार्यकारियों पर लागू होती है, ताकि चुनाव साफ़-सुथरे ढंग से हो सके। चलिए देखते हैं इसको समझने के लिए आपको बस कुछ ही बातें याद रखनी होंगी।
आमतौर पर, चुनाव की घोषणा (ईएलसी द्वारा) होने के बाद तुरंत लागू हो जाता है। इसका मतलब है कि आप अब से किसी भी तरह का मतभेद पैदा करने वाला प्रचार नहीं कर सकते – चाहे वह झूठी जानकारी फैलाना हो या सार्वजनिक स्थानों को मुफ्त में इस्तेमाल करना हो। यह अवधि तब तक चलती रहती है जब तक वोटिंग समाप्त नहीं होती और परिणाम घोषित नहीं होते।
1. विज्ञापन और मीटिंग्स पर रोक: सरकार या कोई भी सरकारी अधिकारी चुनावी विज्ञापनों के लिए पैसा खर्च नहीं कर सकता, चाहे वह टीवी हो या सोशल मीडिया।
2. रैली और जनसभा की सीमाएँ: किसी भी बड़ी सभा को स्थानीय प्रशासन की अनुमति लेनी पड़ती है, ताकि शोर-शराबे से जनता पर दवाब न पड़े।
3. सेवा वितरण में निष्पक्षता: चुनाव के समय सरकार द्वारा कोई नई योजना या सुविधाएँ नहीं दी जा सकतीं जो सिर्फ वोट पाने के लिए हो। अगर कुछ नया देना है, तो इसे सभी लोगों को समान रूप से पेश करना पड़ेगा।
4. भ्रष्टाचार और वादे: किसी भी प्रकार का ‘राष्ट्रपति बनना’, ‘अधिकारियों को बदनाम करना’ या ‘किसी विशेष वर्ग को लक्ष्य बनाना’ प्रतिबंधित है।
5. सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था: चुनाव के दौरान पुलिस की उपस्थिति बढ़ाई जाती है, ताकि हिंसा या दंगे न हों। यह जनता को सुरक्षित रखने का बड़ा कदम है।
इन नियमों का पालन न करने पर ईएलसी सीधे कार्रवाई कर सकता है – नोटिस जारी करना, विज्ञापन रोकना, या यहाँ तक कि चुनावी परिणाम रद्द भी किया जा सकता है। इसलिए राजनीतिक पार्टियों के लिए इनको गंभीरता से लेना जरूरी है।
आपके लिए सबसे उपयोगी टिप: जब आप वोट डालने जाएँ, तो किसी भी उम्मीदवार की व्यक्तिगत गालियां या अपशब्द सुनें तो तुरंत रिपोर्ट करें। यह आपका अधिकार है और इससे चुनाव प्रक्रिया में भरोसा बना रहता है। साथ ही, सोशल मीडिया पर मिलते‑जुलते झूठे दावे को शेयर न करें; अगर सच्चाई नहीं पता, तो आधिकारिक स्रोत से जांच लें।
सारांश में, मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट एक ऐसा नियम है जो चुनाव को साफ़ और निष्पक्ष बनाने के लिए बनाया गया है। इसे समझना आसान है – बस याद रखें: प्रचार‑प्रसार सीमित, सरकारी संसाधन का दुरुपयोग नहीं, और जनता की सुरक्षा प्राथमिकता। इन बातों को ध्यान में रखकर आप न सिर्फ एक जागरूक मतदाता बनेंगे, बल्कि देश के लोकतंत्र को भी मजबूत करेंगे।
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने महाराष्ट्र में चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है, जिसके पीछे कानूनी और प्रशासनिक मुद्दे बताए जा रहे हैं। आयोग मार्च 13 तक विभिन्न राज्यों का चुनावी मूल्यांकन कर रहा है और आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए राज्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ नियमित बैठक कर रहा है।
©2025 iipt.co.in. सर्वाधिकार सुरक्षित