जब कोई आपके मत को चुरा ले, तो वो सिर्फ एक वोट नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ चुरा रहा होता है। यही है मतदाता ठगी, एक ऐसा अपराध जिसमें नागरिकों के मतदान के अधिकार को जानबूझकर रोका या विकृत किया जाता है। ये ठगी तब होती है जब किसी के नाम पर बनाया गया मतदाता कार्ड दूसरे के हाथ लग जाए, या फिर एक ही व्यक्ति कई जगह मतदान करे, या फिर एंगनवाड़ी कार्यकर्ता या किसी अधिकारी के दबाव में कोई मत नहीं दे पाए। ये आज भी हो रहा है, और बिहार, उत्तर प्रदेश, नागालैंड जैसे राज्यों में इसके कई मामले सामने आ चुके हैं।
निर्वाचन आयोग, भारत का संवैधानिक निकाय जो चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की जिम्मेदारी रखता है ने इसके खिलाफ कई कदम उठाए हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उन्होंने 12 वैकल्पिक फोटो आईडी जारी कीं, ताकि पर्दानशीन महिलाएं बिना चेहरा दिखाए मत दे सकें। ये तकनीकी बदलाव सिर्फ एक फॉर्मलिटी नहीं, बल्कि एक जीवन बचाने वाला बदलाव है। लेकिन ये सिर्फ एक भाग है। मतदान धोखा, मतदाताओं को भ्रमित करने, उनकी पहचान बदलने या उनके मत को नष्ट करने का अपराध अभी भी गांवों में छिपा हुआ है — जहां लोगों को डराया जाता है, या उन्हें नकली वोटर आईडी दी जाती है।
ये सब क्यों होता है? क्योंकि मतदान एक बल है। जिसके पीछे लाखों रुपये, सत्ता और भविष्य छिपा होता है। जब एक गांव के 500 वोट बदल जाएं, तो पूरा विधानसभा खंड बदल सकता है। इसलिए ये ठगी अकेले गैंगों द्वारा नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक और आर्थिक हितों के लिए योजनाबद्ध तरीके से होती है। आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि आपका एक वोट आपके घर की बिजली, सड़क, स्कूल और अस्पताल का फैसला करता है।
आपके सामने जो पोस्ट्स हैं, वो सिर्फ खबरें नहीं हैं — ये आपके लिए एक शील्ड हैं। यहां आपको बिहार में लागू हुई नई पहचान व्यवस्था, नागालैंड में लॉटरी के नाम पर फैलाया गया धोखा, और आंध्र प्रदेश में चुनाव के बाद भी चल रहे अपराधों के बारे में जानकारी मिलेगी। आप देखेंगे कि कैसे एक आम आदमी की पहचान को बदलकर उसका मत चुरा लिया जाता है, और कैसे निर्वाचन आयोग ने इसके खिलाफ लड़ाई शुरू की है। ये सब आपके लिए एक गाइड है — ताकि आप अपना वोट न सिर्फ दें, बल्कि उसे सुरक्षित भी रखें।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की SIR अभियान को 'अनिवार्य उत्पीड़न' बताते हुए 16 BLO की मौतों का आरोप लगाया, जिसे कांग्रेस और अन्य राज्यों ने भी निंदा की।
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