अगर आप या आपका कोई परिचित पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किया गया हो, तो अक्सर पूछे जाने वाला सवाल होता है – "जमानत कब मिलेगी?" अंतरिम जमानत वही प्रक्रिया है जो गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को तुरंत रिहा कर देती है, जबकि मुख्य केस अभी कोर्ट में चल रहा होता है। यह आम तौर पर तब लागू होती है जब आपराधिक आरोप हल्के हों या साक्ष्य पर्याप्त न हों।
अंतरिम जमानत का मूल उद्देश्य जेल में अनावश्यक समय बर्बाद ना करना और आरोपी को न्याय मिलने तक उसकी ज़िंदगी सामान्य रखनी है। अदालत इसको जल्दी‑जल्दी सुनती है, इसलिए आपराधिक प्रक्रिया तेज़ बनती है।
पहला कदम – पुलिस स्टेशन में लिखित आवेदन देना। आवेदन में आपका पूरा नाम, पता, गिरफ्तारी का कारण और यह बताना कि आप कोर्ट में हाज़िर होने तक कोई जोखिम नहीं पैदा करेंगे। अगर आपके पास वकील हो तो वह भी इस दस्तावेज़ को तैयार कर सकता है।
दूसरा – अदालत की सुनवाई। पुलिस के बयान के बाद जज को आपका आवेदन पढ़कर फैसला करता है। अगर जज को लगता है कि आप जोखिम नहीं बनेंगे, तो वह अंतरिम जमानत दे देता है और एक रक्कम (जमानत राशि) तय कर सकता है जो आपके पास होनी चाहिए। इस पैसे से अदालत आपको जेल से बाहर निकाल देती है।
कभी‑कभी जज पूछते हैं कि आप अपने घर या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ रहेंगे, ताकि केस सुनवाई तक आपका पता पता रहे। यदि ऐसा कोई समझौता हो तो इसे लिखित में भी रखना चाहिए।
जमानत मिलते ही सबसे पहले कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों को पढ़ें और उनका पालन करें। अगर आपको किसी विशेष जगह पर रिपोर्ट करने की हिदायत मिली है, तो समय‑सही वहाँ पहुँचें। यह आपके भविष्य में कोई भी समस्या नहीं आने देता।
दूसरा, अपने वकील से तुरंत संपर्क बनाएँ। आपका केस अभी समाप्त नहीं हुआ है; कोर्ट को आगे के सुनवाई और सबूतों की जरूरत होगी। वकील आपको बताएगा कि कौन‑से दस्तावेज़ जमा करने हैं और कब‑कब उपस्थित होना है।
तीसरा, पुलिस या अदालत से मिलने वाले नोटिस को अनदेखा ना करें। एक छोटी सी चूक भी जमानत रद्द कर सकती है और फिर से जेल भेजा जा सकता है। अगर किसी कारण से आप शर्तें पूरी नहीं कर पाएँ, तो तुरंत वकील को बतायें – वह समाधान ढूँढने में मदद करेगा।
अंत में, अपने परिवार और मित्रों को स्थिति के बारे में सचेत रखें ताकि कोई अनावश्यक भ्रम या डर न बने। जब सब कुछ स्पष्ट हो, तो आप मन की शांति से केस की आगे की कार्यवाही देख सकते हैं।
समझदारी से कदम उठाने पर अंतरिम जमानत एक मददगार साधन बन सकती है – यह न केवल जेल में समय बचाती है, बल्कि न्याय के सही रास्ते को भी तेज़ करती है। याद रखें, नियमों का पालन और वकील की सलाह सबसे बड़ी सुरक्षा हैं।
दिल्ली कोर्ट 5 जून को अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ आदेश सुनाएगी। ED ने कहा है कि केजरीवाल ने जांच में सहयोग नहीं किया और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की है। इस मामले में एक आपराधिक षड्यंत्र के तहत अवैध लाभ उठाने का आरोप है।
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