यौन शोषण एक गम्भीर अपराध है जिसमें किसी व्यक्ति को उसके उम्र या सहमति के बिना यौन संबंध बनाने या उसे ऐसी हरकतों में लिप्त करने की कोशिश की जाती है। यह सिर्फ़ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि पीड़ित की ज़िंदगी पर स्थायी असर डालता है। अगर आप या आपके आसपास कोई इस तरह की स्थिति का सामना कर रहा है, तो तुरंत कदम उठाना जरूरी है।
पहचान आसान हो सकती है अगर आप इन संकेतों पर ध्यान दें:
इनमें से एक भी संकेत दिखे तो बात को हल्का मत समझिए, तुरंत मदद लेनी चाहिए।
भारत में यौन शोषण के खिलाफ कई क़ानून मौजूद हैं – पीसीआर (पब्लिक ऑर्डर एक्ट), IPC की धारा 376, महिला सुरक्षा अधिनियम आदि। आप शिकायत कर सकते हैं:
शिकायत दर्ज करने से पहले जितना संभव हो सबूत इकट्ठा करें – मेसेज, कॉल रिकॉर्ड, फोटो आदि। ये प्रक्रिया को तेज़ और प्रभावी बनाते हैं।
अगर आप बचपन में शोषण के शिकार हुए हैं, तो ‘साइकलोन्गिक वॉलंटियर सेंटर्स’ या बाल मनोवैज्ञानिक से काउंसलिंग करवा सकते हैं। कई NGOs मुफ्त थेरापी और पुनर्वास कार्यक्रम चलाते हैं।
रोकथाम के लिए कुछ आसान कदम अपनाएँ:
यौन शोषण को रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ़ सरकार या पुलिस की नहीं, हम सबकी है। अगर आप खुद सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, तो मदद के लिए कदम बढ़ाएँ – एक छोटा कदम भी बड़ी राहत दे सकता है। याद रखें, आपका आवाज़ सुनाई देती है और न्याय मिलना आपका हक़ है।
मलयालम फिल्म निर्देशक ओमर लुलु के खिलाफ एक युवा अभिनेत्री ने यौन शोषण का मामला दर्ज कराया है। अभिनेत्री का आरोप है कि लुलु ने फिल्म में भूमिका देने का वादा करके कथित तौर पर उनका शोषण किया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
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