शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, दो परिवारों का भी जोड़ है। अक्सर रस्म‑रिवाज देख कर उलझन हो जाती है, पर असली बात ये है कि हर रिवाज़ का अपना कारण होता है. यहाँ हम सबसे आम कदमों को आसान शब्दों में समझेंगे, ताकि आप बिना तनाव के तैयारी कर सकें.
सबसे पहले रोकड़ी/सगाई होती है. इस दिन दूल्हा अपने परिवार को सगाई का नोटिस देता है और हल्के फुल्के तोहफे देता है। फिर मेहँदी की तैयारी शुरू होती है – दुल्हन के हाथों‑पैरों पर डिजाइन बनाते हैं, साथ में संगीत और नाच‑गान भी होते हैं. अगर आप छोटे बजट में करना चाहते हैं, तो मेहँदी को घर में ही करवा सकते हैं, पेशेवर कलाकार से महँगे खर्च की जरूरत नहीं.
शादी का मुख्य भाग जयमाला, फेरों और कुंडन है. जयमाला में दूल्हा‑दुल्हन एक दूसरे को हार पहनाते हैं, जो जुड़ाव का प्रतीक है। फेरों के दौरान सात वचन लिए जाते हैं – जीवनभर साथ रहने की शपथ। कुंडन में दुल्हन के माथे पर हल्दी लगाई जाती है, जिससे वह सुख-समृद्धि की ओर आकर्षित होती है. इन रस्मों को छोटे परिवार या बड़े जमावड़े में मनाया जा सकता है; बस योजना बनाते समय जगह, भोजन और संगीत का ध्यान रखें.
अगर आप आधुनिक शैली चाहते हैं तो डिजिटल निमंत्रण, लाइव स्ट्रीमिंग जैसी चीज़ें जोड़ सकते हैं. इससे मेहमानों को दूर से भी भागीदारी मिलती है, और खर्चा भी कम हो जाता है.
बजट टिप्स: सबसे पहले कुल लागत का अनुमान लगाएँ – वेन्यू, खाना, कपड़े, फ़ोटोग्राफ़ी. फिर प्राथमिकताओं के आधार पर चीज़ें क्रम में रखें। उदाहरण के लिए, अगर आप बड़े भोज चाहते हैं तो सजीव संगीत को घटा सकते हैं. कई बार छोटे स्थानीय कैटरर अधिक स्वादिष्ट और किफायती होते हैं.
शादी की तैयारी में एक चेकलिस्ट बनाना फायदेमंद रहता है: जगह बुकिंग, ड्रेस ट्रायल, मेहँदी कलाकार, फ़ोटोग्राफ़र, संगीतकार, और आख़िर में रिहर्सल. हर आइटम को तय तारीख के साथ लिखें; इससे अंतिम मिनट की दिक्कतें कम होंगी.
शादी के बाद विदाई या बॉन्डिंग रिट्रीट जैसी रस्में होती हैं, जहाँ दूल्हा‑दुल्हन अपने नए जीवन का स्वागत करते हैं. इसको भी छोटा-सा गेट‑टुगेदर रखें; मिठाइयाँ और हल्की संगीत पर्याप्त है.
समापन में याद रखें – शादी का मकसद खुशियों को बाँटना है, न कि खर्चे बढ़ाना. अगर आप सादगी से काम लें तो सभी लोग आराम से आनंद ले पाएँगे। यही सबसे बड़ी जीत है.
देव उठनी एकादशी 2024 का पर्व 12 नवंबर को मनाया जाएगा, जब भगवान विष्णु अपने चार महीने के योग निद्रा से जागते हैं। इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है क्योंकि यह शुभ और वैवाहिक गतिविधियों की शुरुआत का संकेत देता है। भक्त परंपरागत गीत गाकर भगवानों को जागरूक करते हैं और तुलसी-शालिग्राम का विवाह अगले दिन संपन्न होता है।
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