आपने कभी सुना होगा ‘पहंडी अनुष्ठान’ के बारे में, लेकिन ठीक‑ठीक नहीं पता कि ये क्या है? असल में यह एक छोटा‑सा धार्मिक रिवाज़ है जो कई परिवारों में रोज़ाना या खास मौकों पर किया जाता है। इस लेख में हम बात करेंगे इसके अर्थ, कब और कैसे करना चाहिए, और कुछ आसान सुझाव भी देंगे जिससे आप बिना झंझट के इसे अपना सकें।
‘पहंडी’ शब्द का मतलब होता है ‘पहले कदम’ या ‘शुरुआत’। इसीलिए पहंडी अनुष्ठान को अक्सर किसी बड़े कार्य की शुरुआत में किया जाता है – जैसे नया घर, नई नौकरी या शादी के पहले। यह रिवाज़ हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है और बुरी शक्ति को दूर रखता है। अधिकांश लोग इसे घर में छोटे दीपक जलाकर, धूप का चिराग लगाकर और एक छोटा मंत्र पढ़कर करते हैं।
1. **स्थल चुनें**: साफ‑सुथरा कोना या पूजा स्थल सबसे बेहतर है। अगर आपके पास कोई विशेष स्थान नहीं है, तो बाथरूम के बाहर एक छोटा टेबल रख सकते हैं। 2. **समग्री तैयार करें**: दीपक/दीया, धूप का चिराग, हल्का फूल (जैसे गेंदा), और पवित्र जल रखें। अगर आपके पास कुंडलिया या रूद्राक्ष है तो वह भी जोड़ सकते हैं। 3. **शुद्धिकरण**: हाथों को पानी से धोएँ, फिर थोड़ा नमक मिलाकर जल में हल्का घोल बनाएँ। इस पानी से अपने माथे और कलाई पर तीन बार पिचकारें – इससे नकारात्मक ऊर्जा निकल जाती है। 4. **दीप जलाएं**: एक दीपक या दीया जलाकर सामने रखें। धूप का चिराग भी जला दें; ये दो चीज़ें प्रकाश के रूप में सकारात्मक प्रभाव लाती हैं। 5. **सरल मंत्र**: “ॐ शांति, ॐ सुख, ॐ समृद्धि” जैसे छोटे वाक्य रोज़ पढ़ सकते हैं। अगर आप कोई विशेष देवी‑देवता का नाम लेना चाहते हैं तो उसका भी उच्चारण करें। 6. **प्रसाद या फल**: कुछ मीठा (जैसे लड्डू) रखकर उसे बाँट दें। इससे खुशी और सामुदायिक भावना बढ़ती है। 7. **समापन**: अंत में दीपक बुझा दें, धूप का चिराग बंद कर दें और समग्री को साफ‑सुथरा करके रखें। यह प्रक्रिया लगभग पाँच मिनट की होती है – बहुत जल्दी पूरी हो जाती है।
इन आसान कदमों से आप अपने दिन या किसी बड़े कार्य की शुरुआत में सकारात्मक ऊर्जा बना सकते हैं। याद रखिए, अनुष्ठान का असली मकसद मन को शांति देना और नकारात्मक विचारों को हटाना है, इसलिए इसे दिल से करें।
अगर आपके पास पहले से ही कोई अनुष्ठान चल रहा है, तो इस ‘पहंडी’ रिवाज़ को उसमें जोड़ें। कई लोग बताते हैं कि इससे उनका आत्म‑विश्वास बढ़ा और काम में सफलता मिली। आप भी एक बार ट्राय करिए – शायद आपका दिन बदल जाए!
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की 'पहंडी' अनुष्ठान रविवार, 7 जुलाई, 2024 को आरंभ हुआ। परंपरागत रूप से आरती और 'मैलम' अनुष्ठान के बाद, देवताओं को मंदिर के अंदर से बाहर निकाला गया। इसके बाद उनके रथों के लिए भव्य शोभायात्रा शुरू हुई। लाखों श्रद्धालु इस आयोजन को देखने के लिए पुरी पहुंचे।
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