जब हम ‘सम्मान’ शब्द सुनते हैं, तो अक्सर बड़ी-बड़ी बातें सोच लेते हैं। लेकिन असल में, यह सिर्फ़ एक शब्द नहीं, रोज़ की छोटी-छोटी आदतों का समूह है। घर में माँ‑बहन से लेकर ऑफिस में सहकर्मी तक, हर महिला को बराबरी और इज्ज़त मिलनी चाहिए। अगर आप भी कभी इस बात पर सोचते हैं कि क्या आपके व्यवहार में कुछ कमी तो नहीं, तो पढ़िए आगे।
भारत में महिलाएँ घर का दिल, स्कूल की सीख और नौकरी के मैदान में ताकत दोनों बन चुकी हैं। उनका योगदान बिना उन्हें पहचानें समझना मुश्किल है – चाहे वो डॉक्टर हों, इंजीनियर, शिक्षक या किसान की मददगार। जब हम उनकी मेहनत को सराहते हैं, तो पूरा समाज आगे बढ़ता है। इसलिए महिलाओं का सम्मान सिर्फ़ व्यक्तिगत फ़र्ज़ नहीं, बल्कि सामाजिक ज़िम्मेदारी भी है।
1. सुनें और समझें – अक्सर हम अपनी बात जल्दी निकाल लेते हैं। किसी महिला की राय पूछें, उसकी बात को बीच में न काटें। 2. भेदभाव हटाएँ – नौकरी या पढ़ाई में समान अवसर दें। अगर कोई पद पर योग्य है तो लिंग का ज़िक्र ना करें। 3. सुरक्षित माहौल बनाएं – सार्वजनिक जगहों में महिलाओं को आराम से चलने‑फिरने की सुविधा दें, जैसे कि उचित रोशनियां और भीड़भाड़ नहीं। 4. ध्यान रखें भाषा पर – अपमानजनक शब्द या चुटीले कमेंट छोड़ें। एक साधा “धन्यवाद” या “आपकी मदद चाहिए?” बहुत बड़ा फर्क डालता है. 5. समर्थन दिखाएँ – जब महिला को किसी समस्या का सामना करना पड़े, तो उसे अकेला न समझें। कानूनी मदद, स्वास्थ्य सुविधा या बस एक भरोसेमंद कंधा देना महत्वपूर्ण है.
इन छोटे‑छोटे कदमों से आप अपने घर, ऑफिस और समाज में महिलाओं की इज्ज़त बढ़ा सकते हैं। याद रखें, सम्मान सिर्फ़ शब्द नहीं; यह हर दिन के व्यवहार में दिखता है। अगर हम सब मिलकर इस दिशा में काम करें तो एक अधिक न्यायसंगत और खुशहाल भारत बनना निश्चित है।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता अरविंद सावंत द्वारा शाइना एनसी को 'इंपोर्टेड माल' कहने पर विवाद छिड़ा। शाइना एनसी, जो हाल ही में बीजेपी छोड़कर शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुई हैं, ने सावंत की टिप्पणी को महिलाओं के प्रति घृणित मानसिकता का उदाहरण बताया और उनकी इस टिप्पणी के विरोध में नागपाड़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
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