जब आप समाचार देखते हैं तो अक्सर ‘लोक सभा अध्यक्ष’ का नाम सुनते हैं। लेकिन यह पद वास्तव में क्या होता है? सरल शब्दों में कहें तो यह भारतीय संसद की निचली सदन, यानी लोकसभा के अध्यक्ष होते हैं। उनका काम बैठकों को सुचारु चलाना, नियम लागू करना और सभी सांसदों को समान अवसर देना है।
अध्यक्ष बनने की प्रक्रिया बहुत जटिल नहीं है। संसद के पहले सत्र में, सभी सांसद एक-दूसरे पर मतदान करते हैं। सबसे अधिक वोट पाने वाले को अध्यक्ष घोषित किया जाता है। आमतौर पर यह व्यक्ति उस पार्टी से आता है जो अधिकांश सीटें जीतती है, लेकिन कभी‑कभी विरोधी दल के किसी सदस्य का चयन भी हो सकता है अगर वह सभी का भरोसा जिता ले।
चुनाव में वोटिंग खुला या गुप्त रह सकता है, पर मुख्य बात यह है कि चुनाव निष्पक्ष होना चाहिए। चुनाव होने से पहले कई उम्मीदवार अपना परिचय देते हैं और अपने अनुभव को सामने रखते हैं ताकि सांसद उन्हें चुनें।
एक बार चुने जाने के बाद, अध्यक्ष का काम बस बैठकों को सुचारु चलाना नहीं है। वे कई नियमों को लागू करते हैं जैसे कि बहस के दौरान कौन बोल सकता है, कब रोकना है और कैसे वोटिंग करनी है। अगर कोई सांसद अनुशासन तोड़ता है तो अध्यक्ष उसे चेतावनी दे सकते हैं या सत्र से बाहर निकाल सकते हैं।
वे संसद की कार्यवाही को रिकॉर्ड भी करते हैं ताकि बाद में किसी को देख सके कि क्या चर्चा हुई थी और कौन‑सा निर्णय लिया गया। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और जनता को पता चलता है कि उनके प्रतिनिधि किस मुद्दे पर कैसे काम कर रहे हैं।
अध्यक्ष का एक और महत्वपूर्ण काम है विभिन्न पार्टियों के बीच संवाद बनाकर रखना। जब कोई बड़ा विवाद उठता है तो वह दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और समझौता करवाने की कोशिश करते हैं। इससे सत्र में अनावश्यक टकराव नहीं होते और काम आगे बढ़ता रहता है।
आज के समय में, लोक सभा अध्यक्ष को डिजिटल तकनीकों का भी उपयोग करना पड़ता है—ऑनलाइन मतदान, रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग आदि। इस तरह से जनता सीधे देख सकती है कि संसद में क्या हो रहा है और कौन‑से कानून बन रहे हैं।
समाप्ति में यह कहना सही रहेगा कि लोक सभा अध्यक्ष केवल एक पद नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ का एक अहम हिस्सा हैं। उनका काम पारदर्शिता, न्याय और संतुलन बनाए रखना है, जिससे हर नागरिक को सुने जाने का अधिकार मिले। अगर आप राजनीति या संसद में रुचि रखते हैं तो यह समझना ज़रूरी है कि अध्यक्ष कैसे चुने जाते हैं और उनके निर्णय हमारे जीवन पर कैसे असर डालते हैं।
एनडीए के उम्मीदवार ओम बिड़ला को बुधवार को लोक सभा का अध्यक्ष चुना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को ध्वनि मत से स्वीकार किया गया। विपक्ष ने अपने उम्मीदवार कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश को प्रस्तावित किया था, लेकिन वे मतों पर जोर नहीं डाल सके। इसके बाद पीएम मोदी और राहुल गांधी दोनों ने ओम बिड़ला को बधाई दी।
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