जब बारिश भारी होती है या पहाड़ों की मिट्टी ढीली हो जाती है, तो जमीन अचानक नीचे सरकती है। इसे ही लैंडस्लाइड कहते हैं। हमारे देश के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में ये अक्सर सुनाई देती है। पिछले कुछ महीनों में कई गांव बुरे असर से गुजर चुके हैं और लोगों को घर-घर से निकला जाना पड़ा। आप भी अगर इन इलाकों में रहते या यात्रा कर रहे हों तो इस बात को समझना जरूरी है कि लैंडस्लाइड कब और क्यों होती है।
सबसे बड़ा कारण लगातार भारी बरसात है। जब जल मात्रा मिट्टी में भर जाती है तो वह हल्की हो जाती है और ढलान पर फिसलने लगती है। इसके अलावा तेज़ धूप से भी जमीन सूख कर दरारें बनाती है, जिससे बारिश के बाद अचानक लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है। मानवीय कारकों में बेकाबू निर्माण, जंगलों की कटाई और रोड कार्य शामिल हैं। जब पहाड़ी इलाके में पेड़ हटाए जाते हैं तो मिट्टी को पकड़ने वाली जड़ें खत्म हो जाती हैं, जिससे जमीन अस्थिर हो जाती है।
पहले तो मौसम रिपोर्ट पर नज़र रखें। अगर भारी बारिश की चेतावनी आई हो तो पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा टालें या वैकल्पिक रास्ते अपनाएं। घर बनाते समय स्थानीय इंजीनियर से सलाह लें और ढलान वाले हिस्सों में निर्माण से बचें। यदि आप किसी गाँव में रहते हैं, तो जल निकासी के सही सिस्टम को स्थापित करें ताकि पानी जल्दी निकल सके। अचानक जमीन हिलने पर तुरंत खुले मैदान या उच्च जगह की ओर जाएँ; दरवाजे या खिड़कियों के पास न रुकें।
सरकार भी इस समस्या से लड़ने के लिए कई कदम उठा रही है। जंगलों की पुनर्रोपण योजना, बाढ़ नियंत्रण डैम और लैंडस्लाइड चेतावनी सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं। लेकिन इन उपायों को सफल बनाने में स्थानीय लोगों का सहयोग जरूरी है। अगर आप किसी जोखिम वाले क्षेत्र में रहते हैं तो ग्राम प्रधान या स्थानीय प्रशासन से मिलकर बचाव योजनाएं बनाएँ।
लैंडस्लाइड के बाद राहत कार्य भी तेज़ होना चाहिए। पहले प्राथमिक उपचार, पानी और भोजन की व्यवस्था करना ज़रूरी है। निकटतम अस्पतालों की सूची तैयार रखें और आपातकालीन नंबर हमेशा अपने फोन में सेव करें। कई बार लोग बचाव टीम तक पहुंचने से पहले ही असहाय हो जाते हैं, इसलिए खुद को सुरक्षित जगह पर ले जाना सबसे बड़ा कदम है।
समझदारी यही है कि लैंडस्लाइड की खबरें सुनते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर दें। छोटी‑छोटी सावधानियों से बड़ी जान बचाई जा सकती है। अगर आप इन टिप्स को अपनाएँ तो न सिर्फ अपने परिवार को सुरक्षित रखेंगे, बल्कि पड़ोस में भी जागरूकता बढ़ेगी।
अंत में याद रखें, प्रकृति की शक्ति को कम नहीं आँका जाता, लेकिन हम उसकी मार का सामना करने के लिए तैयार रह सकते हैं। लैंडस्लाइड से बचाव के बारे में अधिक जानकारी और अपडेट हमारे टैग पेज पर मिलती रहेगी, इसलिए इसे बार‑बार चेक करते रहें।
केरल के वायनाड जिले में हुई भारी बारिश ने बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड को उत्पन्न किया, जिससे भारी तबाही और जान-माल का नुकसान हुआ है। अब तक 24 लोगों के मरने की खबर है और कई लोग मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। सेना और एनडीआरएफ टीम बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। राज्य सरकार स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है और राहत शिविर लगाए गए हैं।
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