क्या आपको कभी ऐसा लगा कि आपका बच्चा या दोस्त अचानक से उदास, गुस्से में या उलझन में है? ये सब आम बात है जब आप किशोर उम्र के होते हैं। इस उमर में दिमाग और दिल दोनों तेज़ी से बदलते हैं, इसलिए भावनाएँ भी अक्सर उछाल लेती हैं। हम यहां कुछ आसान बातें बताएँगे जिससे आप अपनी या दूसरों की किशोर भावनाओं को बेहतर समझ सकें।
पहले बात करते हैं सबसे ज़्यादा दिखने वाले बदलावों की। स्कूल, दोस्ती और भविष्य की सोच सब एक साथ दिमाग में चलती रहती है। अक्सर आप देखेंगे कि वे दो-तीन दिन में बहुत खुश, फिर अगले ही दिन गुस्से में या उदास हो सकते हैं। ये मूड‑स्विंग केवल हार्मोन के कारण नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, परीक्षाओं और घर के माहौल से भी आते हैं।
दूसरी बात है पहचान की खोज। किशोर उम्र में लोग अपने लिये कौन सी चीज़ सही है, क्या पसंद है या कौन सा करियर चुनना चाहिए, ये सब सोचते‑समझते थक जाते हैं। इस दौर में छोटी‑छोटी सफलता उन्हें मोटिवेट करती है और असफलता से डर भी लग सकता है। इसलिए जब कोई छोटा‑सा लक्ष्य पूरा हो जाए तो उसकी सराहना करें; इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
अगर आप देखते हैं कि किशोर लगातार तनाव या उदासी में रहता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। सबसे पहले बात-चीत का दरवाज़ा खोलें। बिना टोकरे पूछें, "आज तुम्हारा दिन कैसा रहा?" अक्सर बस एक सुनने वाला कान ही मददगार साबित होता है।
दूसरा तरीका है नियमित शारीरिक एक्टिविटी को बढ़ावा देना। खेल‑कूद, साइकिल चलाना या सिर्फ तेज़ चाल से टहलना हार्ट रेट बढ़ाता है और मस्तिष्क में ख़ुशी वाले हार्मोन रिलीज़ होते हैं। अगर संभव हो तो परिवार के साथ मिलकर कोई आउटडोर एक्टिविटी प्लान करें; इससे जुड़ाव भी मजबूत होगा।
तीसरा, स्क्रीन टाइम को नियंत्रित रखें। सोशल मीडिया पर लगातार स्क्रॉल करने से तुलना की भावना बढ़ती है और आत्म‑सम्बंधी समस्याएँ बन सकती हैं। एक दिन में दो‑तीन घंटे तक ही सीमित करें और पढ़ाई या हॉबीज़ के लिए समय निकालें।
अगर स्थिति गंभीर लग रही हो, जैसे लगातार नींद न आना, खाने पीने की आदत बिगड़ जाना, तो पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें। स्कूल काउंसलर या मनोवैज्ञानिक से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं; यह बिल्कुल सामान्य है और कई लोगों को इससे लाभ मिलता है।
आखिरकार, याद रखें कि किशोरावस्था एक ट्रांज़िशन पीरीयड है, जहाँ सब कुछ तेज़ी से बदलता है। आप भी कभी इस उम्र में थे या अभी हैं, तो खुद को थोड़ा धैर्य दें और छोटे‑छोटे कदमों से आगे बढ़ें। सही समर्थन और समझदारी के साथ यह दौर आसानी से पार हो जाएगा।
पिक्सार की ऑस्कर विजेता फिल्म 'इनसाइड आउट' के सीक्वल में 13 वर्षीय राइली के किशोर मस्तिष्क में अब चार नई भावनाओं का आगमन हुआ है: ईर्ष्या, शर्म, ऊब, और चिंता। यह फिल्म इन भावनाओं की वैज्ञानिक सच्चाईयों पर भी ध्यान केंद्रित करती है और राइली के विकास में इनके महत्त्व को दर्शाती है।
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