जब हम 'कर्मी शोषण' सुनते हैं तो दिमाग में अक्सर मेहनत करने वाले लोग कैसे निचले दर्जे पर रखे जाते हैं, ये आता है। साधारण शब्दों में कहें तो यह वो स्थिति है जहाँ कामगारों से उनके हक़ के हिसाब से कम वेतन, देर‑से‑भुगतान या अनियमित घंटों की मांग की जाती है। भारत में यह समस्या छोटे कारखानों, निर्माण साइट और यहाँ तक कि घरेलू मददगारों में भी आम है।
पहला कारण जानकारी का अंतर है – कई कामगार अपने अधिकारों से अनभिज्ञ होते हैं। दूसरा, कुछ नियोक्ता कानून को तोड़ कर लागत कम करना चाहते हैं; इसलिए वे अनुबंध‑रहित या अंशकालिक कर्मचारियों को बिना उचित सुरक्षा के रख लेते हैं। तीसरा, सरकारी निगरानी की कमी और सख्त दंड ना मिलने से ऐसे व्यवहार जारी रहता है। इन सबका असर न सिर्फ आर्थिक रूप से बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
सबसे पहला कदम है अपने अधिकारों को जानना – भारत में न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान और काम के घंटे स्पष्ट हैं। अगर कोई नियोक्ता इन नियमों का उल्लंघन करे तो स्थानीय श्रम विभाग या ट्रेड यूनियन से मदद लेनी चाहिए। दूसरा, लिखित अनुबंध हमेशा करवाएँ; इसमें सैलरी, कार्य समय और छुट्टियों की जानकारी होनी चाहिए। तीसरा, समूह में आवाज़ उठाने से शक्ति मिलती है – कई कामगार मिलकर हड़ताल या विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
सरकारी पहल भी मददगार है। हाल के सालों में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बनाकर शिकायतें आसानी से दर्ज की जा सकती हैं और तेज़ जवाब मिलने की संभावना बढ़ी है। यदि आप छोटे व्यवसाय चलाते हैं, तो अपने कर्मचारियों को उचित वेतन देना न सिर्फ कानूनी फर्ज़ है बल्कि काम में उत्साह भी लाता है। इससे उत्पादकता बढ़ती है और बेमिसाल भरोसा बनता है।
अंत में याद रखें, कर्मी शोषण का अंत तभी होगा जब हर पक्ष अपनी जिम्मेदारी समझे। कामगारों को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए, नियोक्ताओं को कानून का सम्मान करना चाहिए और सरकार को निगरानी सख्त करनी चाहिए। यही तिकड़ी मिलकर एक स्वस्थ कार्यस्थल बना सकती है जहाँ सबको बराबरी का हक़ मिले।
ब्रिटेन का सबसे धनी परिवार हिंदुजा स्विस अदालत के उस फैसले के खिलाफ अपील की है जिसमें कुछ परिवार के सदस्यों को कर्मियों का शोषण करने के लिए जेल की सजा सुनाई गई थी। परिवार के वकीलों ने यह स्पष्ट किया कि वे इस फैसले से 'निराश और स्तब्ध' हैं। आरोपों में कर्मचारियों की पासपोर्ट जब्त करना, उनकी गतिविधियों पर निर्बंध लगाना और कम वेतन पर लंबी घंटों तक काम कराना शामिल है।
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