अगर आपको अक्सर थकावट, वजन कम होना या अनजाने रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखते हैं तो यह कैंसर का पहला इशारा हो सकता है। डर के बजाय तुरंत डॉक्टर से मिलें – जल्दी पता चलने पर इलाज आसान बन जाता है। इस लेख में हम बताएँगे कि निदान कैसे किया जाता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
कैंसर के शुरुआती संकेत अक्सर रोजमर्रा की बीमारियों जैसा लगते हैं: लगातार खांसी, दर्द, सूजन या त्वचा पर अनियमित दाने। अगर ये लक्षण दो‑तीन हफ्तों से अधिक चलें तो डॉक्टर को दिखाना बेहतर रहेगा। याद रखें, हर दर्द कैंसर नहीं है लेकिन बिना जांच के इसे नज़रअंदाज़ करना जोखिम भरा हो सकता है।
डॉक्टर सबसे पहले शारीरिक परीक्षण करता है, फिर लक्षणों के हिसाब से इमेजिंग या बायोप्सी का आदेश देता है:
इन टेस्टों के बाद डॉक्टर आपको रिपोर्ट समझाएगा और आगे का इलाज तय करेगा। अगर बायोप्सी की जरूरत हो तो तैयारी आसान है – कुछ घंटे पहले हल्का भोजन करें, दवाइयों को डॉक्टर की सलाह से रोकें और आराम से रहें।
स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी मददगार होते हैं। उदाहरण के लिए, 40‑से‑50 साल के पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग और महिलाओं को स्तन तथा गर्भाशय ग्रीवा के लिए मैमोग्राम या पीएपी टेस्ट करवाना चाहिए। यह प्रिवेंशन की तरह है – रोग पता चलने से पहले ही रोकथाम संभव बनती है।
जब आपको निदान का परिणाम मिलता है, तो कई बार डर और उलझन होती है। इस समय भरोसेमंद डॉक्टर या कैंसर सपोर्ट ग्रुप से बात करें। सही जानकारी मिलने पर आप बेहतर निर्णय ले पाएँगे – चाहे सर्जरी, कीमोथेरपी या केवल फॉलो‑अप हो।
अंत में कुछ आसान टिप्स:
कैंसर निदान जटिल लग सकता है, पर सही कदम उठाने से प्रक्रिया सरल हो जाती है। याद रखिए, जल्दी पता चलने वाला कैंसर अक्सर ठीक किया जा सकता है। इसलिए किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत जांच करवाएँ।
केट मिडलटन ने रविवार, 14 जुलाई, 2024 को विंबलडन पुरुष फाइनल में भाग लिया, जो कैंसर की घोषणा और कीमोथेरेपी के बाद उनकी दूसरी सार्वजनिक उपस्थिति थी। उनकी इस दुर्लभ उपस्थिति ने प्रशंसकों को आश्चर्यचकित कर दिया। मिडलटन अपनी 9 साल की बेटी, राजकुमारी शार्लोट के साथ आईं और उन्होंने बैंगनी रंग की ड्रेस पहनी थी, जो विंबलडन के आधिकारिक रंगों में से एक है।
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