अगर आप कभी दवा खरीदते हैं तो यह जानना ज़रूरी है कि वह दवा कैसे बनाई गई। जि एम पि, यानी Good Manufacturing Practice, एक ऐसा नियम है जो औषधियों को साफ़‑सुथरे, सुरक्षित और असरदार बनाने के लिए बनाया गया है। इस नियम का पालन करने वाली कंपनियां अपने फ़ैक्ट्री में खास चेक‑लिस्ट रखती हैं – जैसे कच्चे माल की जांच, मशीनों की सफ़ाई, कर्मचारियों की ट्रेनिंग आदि। इससे दवा बनाते समय गलती या कंटैमिनेशन कम हो जाता है।
1. साफ‑सफाई: हर मशीन, टैंक और रूम को नियमित रूप से साफ़ किया जाता है।
2. कच्चा माल जांच: इस्तेमाल होने वाली सामग्री की शुद्धता का प्रमाण होना चाहिए।
3. दस्तावेज़ीकरण: हर कदम लिखित में रखना ज़रूरी है, ताकि ऑडिट के समय सब दिखाया जा सके।
4. कर्मचारी प्रशिक्षण: काम करने वाले लोगों को GMP की जानकारी और अभ्यास सिखाया जाता है।
5. गुणवत्ता नियंत्रण: तैयार उत्पाद का हर बैच टेस्ट किया जाता है, ताकि दवा सही मात्रा में हो.
पिछले कुछ महीनों में भारतीय फ़ार्मास्यूटिकल सेक्टर ने कई बड़े बदलाव देखे हैं। पहले ही महीने में एक नई दिशा-निर्देश जारी हुआ, जिसमें छोटे‑बड़े सभी दवा निर्माता को अपने प्रोडक्शन लाइन्स में एआई‑आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया। इसका मकसद रियल‑टाइम डेटा से किसी भी गड़बड़ी को तुरंत पकड़ना है।
इसी बीच, कुछ प्रमुख कंपनियों ने अपने वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि GMP मानकों का पालन करने से उनका निर्यात बढ़ा। विशेषकर यूरोपीय बाजारों में अब भारतीय दवाओं को आसानी से मंजूरी मिल रही है क्योंकि EU की भी कठोर गुणवत्ता शर्तें हैं।
एक और दिलचस्प खबर यह है कि भारत सरकार ने अगले साल से सभी नई फ़ार्मास्यूटिकल इकाई के लाइसेंसिंग प्रक्रिया में GMP ऑडिट को अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है, जो भी नई कंपनी दवा बनाना चाहती है, उसे पहले पूरी जाँच‑परख करनी होगी। यह कदम उपभोक्ताओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
अगर आप एक फ़ार्मा स्टूडेंट या उद्योग में काम करने वाले हैं, तो इन बदलावों पर नज़र रखना फायदेमंद रहेगा। कई ऑनलाइन वेबिनार और ट्रेनिंग प्रोग्राम भी लॉन्च हुए हैं जहाँ विशेषज्ञ GMP के नवीनतम टूल्स और केस स्टडीज़ शेयर कर रहे हैं।
अंत में इतना ही – जि एम पि सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि दवा की क्वालिटी को भरोसेमंद बनाने का तरीका है। जब निर्माता इस पर ध्यान देते हैं, तो हम रोगी के रूप में भी安心 (आश्वस्त) महसूस करते हैं। आगे भी ऐसे अपडेट्स और आसान समझाइशें पाने के लिए भारतीय प्रतिदिन समाचार पढ़ते रहिए।
साई लाइफ साइंसेज का आईपीओ आवंटन सोमवार, 16 दिसंबर 2024 को फाइनल होने की उम्मीद है। आईपीओ को निवेशकों से 10.26 गुना की सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुई है। निवेशक बीएसई, एनएसई या केफिन टेक्नोलॉजीज की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवंटन स्थिति की जांच कर सकते हैं। सूचीबद्धता 18 दिसंबर 2024 को हो सकती है, वहीं अनलिस्टेड शेयरों में 11% का ग्रे मार्केट प्रीमियम देखा जा रहा है।
©2025 iipt.co.in. सर्वाधिकार सुरक्षित