अगर आप भारत के धार्मिक यात्राओं की बात करते हैं तो जगन्नाथ मंदिर ज़रूर नाम आएगा। यह मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि कई शताब्दियों से लोगों को आकर्षित करने वाला सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और अपनी मन्नतें पूरी होते देखते हैं। इस लेख में हम आपको मंदिर के इतिहास, दर्शन और यात्रा की आसान टिप्स देंगे, ताकि आपका सफ़र सुगम हो सके।
जगन्नाथ का मूल नाम ‘जगन्नाथ’ है, जिसका मतलब है “सभी जीवों के स्वामी”। इस मंदिर की स्थापना 8वीं‑9वीं सदी में राजाओं ने करवायी थी, लेकिन असली पुनर्निर्माण 12वें शताब्दी में चंद्रशेखर देव ने किया। यहाँ का शिल्प शैली नक्काशी और पत्थर की जटिल कामकाज से भरपूर है – मुख्य द्वार पर गढ़े गए माँडवाले हाथों के चित्र देखिए, तो आप ही सोचेंगे कि कारीगर कितने कुशल थे। मंदिर परिसर में कई छोटे-छोटे श्मशान भी हैं जो प्राचीन काल की स्मृति को जीवित रखते हैं।
जगन्नाथ तक पहुँचना आसान है – अगर आप दिल्ली से आ रहे हैं तो हवाई जहाज से अमरावती (जयपुर) पहुँचें, फिर टैक्सी या बस से 150 किमी दूर स्थित पिपली रोड पर उतरें। स्थानीय ऑटो और रिक्शा आपको मंदिर के द्वार तक ले जाएंगे। सबसे अच्छा समय अक्टूबर‑जनवरी है, जब मौसम ठंडा रहता है और दर्शनीय स्थल साफ़ दिखते हैं। सुबह की पहली पुजा (सूर्योदय) देखना न भूलें; यह अनुभव शांति से भरपूर होता है।
पूजा में भाग लेने के लिये हल्का कपड़ा पहनें और स्नान करके आएँ। मंदिर के अंदर कैमरा नहीं लाना चाहिए, इसलिए मोबाइल का बैकअप रखें। अगर आप खाने‑पीने की व्यवस्था चाहते हैं तो परिसर के बाहर स्थित ‘भोजनालय’ में स्थानीय व्यंजन जैसे पक्की दाल, चावल और रोटी मिलेंगे – ये सभी शाकाहारी विकल्प हैं जो यात्रियों को पसंद आते हैं।
सप्ताहांत या त्योहारों में भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए जल्दी पहुँचना फायदेमंद रहेगा। अगर आप विशेष पूजा जैसे ‘अभिषेक’ करवाना चाहते हैं तो पहले से ऑनलाइन बुकिंग कर लें; इससे आपको लाइन में खड़े होने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और आपका समय बचेगा।
जगन्नाथ मंदिर का मुख्य द्वार एक बड़े शंख के आकार का है, जिसके पीछे ‘संकट मोचन’ पत्थर रखी हुई है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस पर हाथ रख कर वे सभी परेशानियों से मुक्त हो सकते हैं। यही कारण है कि यहाँ कई लोग अपने जीवन की समस्याओं के समाधान के लिये आते हैं। आप भी एक बार जाकर देखिए, शायद आपकी मन्नतें पूरी हों।
सफर समाप्त करने से पहले मंदिर के पास स्थित ‘जगन्नाथ झील’ पर थोड़ा समय बिताएँ। जलाशय में शीतल हवा और शांत पानी मन को तरोताजा कर देता है। बच्चों के साथ आए परिवारों को यहाँ की छोटी नाव यात्रा भी बहुत पसंद आती है।
इस तरह, चाहे आप इतिहास के प्रेमी हों या सिर्फ आध्यात्मिक शांति की तलाश में, जगन्नाथ मंदिर आपके लिए एक बेहतरीन गंतव्य है। सही तैयारी और थोड़ी जानकारी से आपका अनुभव यादगार बन जाएगा। अब देर किस बात की? अपनी यात्रा की योजना बनािए और इस पावन स्थल पर कदम रखें।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की 'पहंडी' अनुष्ठान रविवार, 7 जुलाई, 2024 को आरंभ हुआ। परंपरागत रूप से आरती और 'मैलम' अनुष्ठान के बाद, देवताओं को मंदिर के अंदर से बाहर निकाला गया। इसके बाद उनके रथों के लिए भव्य शोभायात्रा शुरू हुई। लाखों श्रद्धालु इस आयोजन को देखने के लिए पुरी पहुंचे।
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