घर में झगड़े, मारपीट या ज़बरदस्ती कभी भी चलने नहीं चाहिए। जब पति‑पत्नी, माँ‑बेटा या भाई‑बहन के बीच किसी तरह की शारीरिक या मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार हो तो उसे घरैलू हिंसा कहते हैं। अक्सर लोग इसे निजी मामला मान लेते हैं, पर असल में यह एक गंभीर अपराध है और कानूनी रूप से सजा योग्य भी। अगर आप या आपका कोई जानने वाला इस समस्या से जुझ रहा है, तो तुरंत कदम उठाना ज़रूरी है—नहीं तो चोटें बढ़ सकती हैं।
पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने एक केस में महिला को बचाया, जब उसने पति की लगातार मारपीट की शिकायत दर्ज करवाई थी। कोर्ट ने तुरंत राहत आदेश दिया और आरोपी को बंधक रख लिया। इसी तरह मुंबई में एक परिवार में बहन पर मानसिक दबाव बना रहा था; सामाजिक कार्यकर्ता के सहयोग से वह न्यायालय तक पहुंची और अब उसकी सुरक्षा योजना बन गई है। ऐसे कई केस दिखाते हैं कि सही जानकारी और साहसिक कदमों से आप या आपका प्रियजन बच सकता है।
पहला कदम: तुरंत 100 पर पुलिस को बुलाएँ, खासकर अगर आपकी सुरक्षा खतरे में हो। दूसरा, नजदीकी महिला हेल्पलाइन (181) या राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करें; ये लाइन 24×7 खुली रहती हैं और आपको सही दिशा दिखाती हैं। तीसरा, अपने निकट के डॉ. भी मदद कर सकते हैं—कभी‑कभी डॉक्टर की रिपोर्ट कोर्ट में बहुत काम आती है।
अगर आप आर्थिक रूप से निर्भर हैं तो महिला विकास मंत्रालय की योजना ‘संकल्प’ को देखिए। इस योजना के तहत आपको वित्तीय सहायता, आवास व रोजगार के अवसर मिलते हैं। साथ ही कई NGOs मुफ्त कानूनी सलाह भी देती हैं; बस उनका पता इंटरनेट पर “घरैलू हिंसा मदद” खोजें और संपर्क करें।
आपके पास साक्ष्य होना जरूरी है—फ़ोन रिकॉर्ड, संदेश, मेडिकल रिपोर्ट या वीडियो सबूत कोर्ट में काम आते हैं। ऐसे सबूतों को सुरक्षित रखें, चाहे फ़ोल्डर में रखिए या क्लाउड पर अपलोड करिए। याद रखें, आप अकेले नहीं हैं; सरकार, NGOs और कई नागरिक संगठनों ने मिलकर इस समस्या का हल ढूँढा है।
अंत में एक छोटा सा सुझाव: घर के भीतर खुली बातचीत रखें। अगर कोई छोटी‑सी बात बढ़ती दिखे तो तुरंत चर्चा करें, ताकि बिंदु बनने से पहले ही उसे सुलझाया जा सके। अक्सर संवाद की कमी से हिंसा का चक्र शुरू होता है। इसलिए अपने रिश्तों को समझदारी और सम्मान से बनाएँ।
उगांडा की ओलंपिक धावक रेबेका चेप्टेगी की दुखद मृत्यु एक जमीन विवाद के बाद हुई लड़ाई में पेट्रोल से जलाए जाने के बाद हो गई। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना केन्या के ट्रांस नज़ोइया में हुई। 33 साल की रेबेका ने 2024 पैरिस ओलंपिक में उगांडा का प्रतिनिधित्व किया था।
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