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उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ से तूफान: तापमान में गिरावट, IMD ने जारी की चेतावनी

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उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ से तूफान: तापमान में गिरावट, IMD ने जारी की चेतावनी
  • मई, 6 2026
  • के द्वारा प्रकाशित किया गया Divya B

अप्रैल 2026 की चिलचिलाती गर्मी ने उत्तर भारत के लोगों को बेहाल कर दिया था, लेकिन अब राहत का समय आ गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 अप्रैल से शुरू हुई इस घटना में बताया कि पश्चिमी विक्षोभउत्तर भारत के कारण अचानक बदले मौसम ने क्षेत्र में ठंडक ला दी है। शुक्रवार शाम को आसमान में काले बादलों के छाने, तेज हवाओं चलने और गरज के साथ बारिश होने से लोगों को लू से राहत मिली। यह कोई साधारण बारिश नहीं थी; बल्कि एक जटिल मौसमी प्रणाली का नतीजा था जिसने कई राज्यों में हाहाकार मचा दिया।

यह बदलाव अचानक नहीं हुआ। वास्तव में, अप्रैल की भयंकर गर्मी ने वਾयुमंडल में ऐसी स्थितियां बना दी थीं जहां समुद्र से आने वाली नम हवाएं भीतर की ओर बढ़ रही थीं। पश्चिमी विक्षोभ, जो मूल रूप से भूमध्यसागर के ऊपर बनने वाली एक कम दबाव वाली प्रणाली है, पूर्व की ओर बढ़ना शुरू कर देती है। इसे सबट्रोपिकल वेस्टर्न जेट स्ट्रीम कहिए या ऊपरी वायुमंडलीय हवाएं, ये शक्तियां इस प्रणाली को भारत तक खींच लाती हैं। जब यह नमी भरी हवा उत्तर भारत पहुंचती है, तो जमीन के पास की गर्म हवा ऊपर उठती है, जिससे वायुमंडल में अस्थिरता पैदा होती है।

मौसम का खेल: विज्ञान और असर

जब पश्चिमी विक्षोभ की नम हवाएं स्थानीय गर्म हवाओं से मिलती हैं, तो एक ऐसा सिस्टम बनता है जिसमें तेज आंधी और बारिश शामिल होती है। इस प्रणाली को जेट स्ट्रीम और ऊपरी हवा के चक्रवाती प्रसार से मजबूती मिली थी। 27 अप्रैल 2026 को राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सों में धूलभरी आंधी और हल्की बारिश की संभावना थी। अनुमान था कि लगभग 30 से 50 प्रतिशत क्षेत्रों में इसका असर दिखेगा।

लेकिन 28 से 30 अप्रैल 2026 के बीच मौसम की गतिविधियां और तीव्र हो गईं। इस दौरान पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का असर दिखा। इन दिनों में लगभग 50 से 75 प्रतिशत क्षेत्रों में मौसम बदलने की संभावना रही। IMD के अनुसार, बारिश और तूफान ज्यादा देर तक नहीं रहे, लेकिन काफी तेज रहे। हवाओं की रफ्तार 40 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंची, जिससे धूलभरी आंधी उठी। इसके बाद 15 से 45 मिनट तक तेज बारिश हुई, और कुछ जगहों पर इसके बाद हल्की बूंदाबांदी भी जारी रही।

दिल्ली-एनसीआर में येलो अलर्ट और तापमान में गिरावट

दिल्ली में मौसम विभाग द्वारा गुरुवार को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का अनुमान लगाया गया था। मौसम विभाग ने गुरुवार तक दिल्ली में बारिश, तूफान और तेज हवाओं के लिए येलो अलर्ट जारी किया था। IMD ने आगामी 48 घंटों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया था क्योंकि 18 राज्यों में तूफान और बारिश की चेतावनी थी। अधिकांश मौसम गतिविधियां दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे के बीच देखी गईं। उत्तर भारत के कई राज्यों में तेज हवाओं, आंधी और बारिश के साथ कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। बिजली चमकने और गरजने की भी संभावना रही।

तापमान पर इस मौसम परिवर्तन का सीधा प्रभाव पड़ा। पहले जहां तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ था, वहीं मंगलवार शाम से इसमें गिरावट शुरू हुई। सप्ताह के बीच तक तापमान 36 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच आ गया, जिससे करीब 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। कुछ क्षेत्रों में तो तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट उन लोगों के लिए राहत की बात है जिन्हें गर्मी से बहुत परेशानी हो रही थी। हालांकि, गर्मी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी, लेकिन तापमान में आई गिरावट से लोगों के लिए बाहर निकलना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया था।

स्वास्थ्य और किसानों पर प्रभाव

स्वास्थ्य और किसानों पर प्रभाव

इस अचानक मौसम परिवर्तन का लोगों के स्वास्थ्य पर भी सीधा असर पड़ा। तेज गर्मी और लू से डिहाइड्रेशन और थकान की समस्या थी, लेकिन अचानक बारिश और ठंडे मौसम से सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं भी बढ़ने की संभावना थी। डॉक्टरों ने सलाह दी कि लोग पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, धूप में ज्यादा देर तक न रहें और हल्के कपड़े पहनें। घर से बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखना जरूरी था क्योंकि मौसम अचानक बदल सकता था।

किसानों के लिए भी मौसम विभाग ने विशेष सलाह दी थी कि वे बदलते मौसम से सतर्क रहें। अचानक आने वाली आंधी और बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए उन्हें अपने खेतों की निगरानी रखनी चाहिए। मौसम विभाग ने बताया कि यह उतार-चढ़ाव कई दिनों तक जारी रहने वाला था।

Frequently Asked Questions

Frequently Asked Questions

पश्चिमी विक्षोभ क्या है और यह कैसे काम करता है?

पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागर के ऊपर बनने वाली एक कम दबाव वाली मौसमी प्रणाली है। यह नमी भरी हवाओं को लेकर पूर्व की ओर बढ़ती है और जब यह उत्तर भारत पहुंचती है, तो स्थानीय गर्म हवाओं से मिलकर अस्थिरता पैदा करती है। इससे बादल बनते हैं और गरज के साथ बारिश होती है। यह प्रणाली जेट स्ट्रीम द्वारा भारत तक खींची जाती है।

कौन से राज्य इस मौसम परिवर्तन से प्रभावित हुए?

27 अप्रैल से शुरू हुई इस घटना में राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल सहित 18 राज्यों में तूफान और बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। इनमें से अधिकांश उत्तरी और पूर्वी राज्यों में सबसे अधिक असर दिखा।

तापमान में कितनी गिरावट दर्ज की गई?

अप्रैल की भयंकर गर्मी के बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की सामान्य गिरावट दर्ज की गई। पहले तापमान 42 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच था, जो बाद में 36 से 41 डिग्री सेल्सियस आ गया। कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को राहत मिली।

लोगों को इस मौसम परिवर्तन से कैसे बचना चाहिए?

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। धूप में ज्यादा देर तक न रहें और हल्के कपड़े पहनें। चूंकि मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए घर से बाहर निकलते समय हमेशा छाता या रेनकोट साथ रखें। सर्दी-जुकाम से बचने के लिए भी सावधानी बरतें।

किसानों के लिए इस मौसम का क्या मतलब है?

किसानों के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि अचानक आने वाली तेज आंधी और बारिश फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे बदलते मौसम से सतर्क रहें और अपने खेतों की निगरानी करें। उन्हें अपनी फसलों की सुरक्षा के उपाय करने चाहिए ताकि प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान कम हो सके।

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