अगर आप क्रिकेट पसंद करते हैं तो Virat Kohli का नाम सुनते ही दिल धड़कता है. कई सालों से वह टीम के अटूट हिस्सा रहे हैं, पर उनका सफ़र आसान नहीं था. इस लेख में हम देखेंगे कि कैसे एक छोटे शहर से निकला बच्चा अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका.
Virat का जन्म 5 नवम्बर 1988 को दिल्ली के पास अर्नाचल में हुआ था. बचपन में ही वह गली‑गली क्रिकेट खेलते थे. स्कूल की टीम में उनका नाम चमकने लगा और जल्दी ही राष्ट्रीय स्तर पर चयनित हुए. 2008 में भारत ने उन्हें एक-डेज़ अंतरराष्ट्रीय मैच में बुलाया, लेकिन असली ब्रेक 2010 के विश्व कप क्वालिफायर में आया जब उन्होंने 100* बनाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया.
उसके बाद वह लगातार अच्छे स्कोर करते रहे. टेस्ट में पहली बार 2011 में 119 रन और ODI में 200* की पारी ने उनके लिए एक मजबूत जगह बना ली. इन रिकॉर्ड्स ने उन्हें ‘स्ट्राइक रेट’ वाला बॅटर बना दिया, जिसका मतलब है कि वो जल्दी रन बनाते हैं.
आज Virat की फॉर्म अभी भी शानदार है. 2024‑25 सीजन में उन्होंने ODIs में औसत 55 और T20 में स्ट्राइक रेट 138 रखी. उनका कप्तान होना भी टीम को नई ऊर्जा देता है; कई युवा खिलाड़ी उनके एटिट्यूड से सीखते हैं.
फिटनेस की बात करें तो वह हर दिन जिम, दौड़ और योग करते हैं. उसका फिटनेस प्लान अक्सर मीडिया में दिखता है और युवाओं के बीच फॉलो किया जाता है. यही कारण है कि उम्र 34 होने के बाद भी वह तेज़ी से मैदान पर दौड़ पाते हैं.
सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, Virat का सोशल मीडिया फ़ॉलोइंग लाखों में है. Instagram और Twitter पर उनके पोस्ट अक्सर नई खबर बन जाते हैं, चाहे वो बैटिंग टिप्स हों या अपने परिवार की तस्वीरें.
भविष्य में भी उम्मीद है कि वह कई रिकॉर्ड तोड़ेंगे. अब तक उन्होंने 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शतक बनाए हैं और उनकी औसत अभी भी बढ़ रही है. अगर आप उनका खेल देखना चाहते हैं, तो IPL, टेस्ट सीरीज़ या वर्ल्ड कप के मैचों को मिस न करें.
संक्षेप में, Virat Kohli सिर्फ एक बॅटर नहीं, वह भारतीय क्रिकेट का प्रेरक शक्ति हैं. उनकी कहानी मेहनत, धीरज और लगातार सुधार की मिसाल है. चाहे आप नया फैन हों या पुराने दर्शक, उनके बारे में जानना हमेशा रोचक रहेगा.
Virat Kohli की T20 World Cup 2024 में निराशाजनक प्रदर्शन जारी है, इस बार Super 8 के मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी बार शून्य पर आउट हो गए हैं, जिससे Ashish Nehra की 2010 T20 World Cup की बराबरी कर ली है। कोहली का टूर्नामेंट में संघर्ष पहले मैच से ही दिख रहा था, जहां उन्होंने USA के खिलाफ 5 गेंदों पर शून्य रन बनाए थे।
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