अगर आप भारतीय राजनीति की खबरों पर नज़र रखे हुए हैं तो ओम बिड़ला का नाम अक्सर सुनते होंगे। वह वर्तमान में लोकसभा के स्पीकर हैं और उनके फैसले संसद के कामकाज को सीधे प्रभावित करते हैं। इस लेख में हम उनकी पृष्ठभूमि, प्रमुख कार्य, हाल की ख़बरें और भविष्य की संभावनाओं पर बात करेंगे – वो भी आसान भाषा में, ताकि आप जल्दी समझ सकें।
ओम बिड़ला ने राजनीति में कदम रखा तब जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ जुड़ाव किया। पहले वे राजस्थान की विधानसभा से विधायक रहे, फिर कई बार सांसद चुने गए। 2019 में उन्हें लोकसभा का स्पीकर चुना गया। इस पद पर उनका मुख्य काम सदन को शांत और व्यवस्थित रखना है – चाहे वह बहस हो या बिलों पर वोटिंग।
स्पीकर बनने के बाद बिड़ला ने कई बार सत्र शुरू करने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए नए नियम पेश किए। उन्होंने डिजिटल मंच का उपयोग बढ़ाया, जिससे सांसद घर से भी प्रश्न पूछ सकते हैं। यह कदम छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के लिये खासा मददगार साबित हुआ है।
पिछले महीने संसद में एक बड़ी चर्चा हुई जब सरकार ने नई कृषि बिल पेश किए। ओम बिड़ला ने सत्र को व्यवस्थित रखने के लिए कुछ समय सीमा तय की और दोनों पक्षों को बात करने का मौका दिया। उनके इस कदम ने बहस को जल्दी खत्म किया, लेकिन कई सांसदों ने इसे असंतोषजनक भी माना।
एक अन्य महत्वपूर्ण घटना में बिड़ला ने महिला सांसदों की सुरक्षा के लिये एक विशेष समिति बनाने की पहल की। यह समिति संसद परिसर में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर काम करेगी। इस कदम को सामाजिक संगठनों से सराहना मिली है।
कभी‑कभी बिड़ला का नाम कोर्ट केसों में भी आता है। हाल ही में एक हाईकोर्ट ने कहा था कि स्पीकर की कार्यवाही को संसद के बाहर नहीं चुनौती दी जा सकती, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत हुई। इस फैसले से यह साफ हुआ कि संविधानिक प्रावधानों के तहत उनका अधिकार कितना सुरक्षित है।
भविष्य की बात करें तो कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बिड़ला 2025 में अगले लोकसभा चुनाव तक अपना पद संभाल सकते हैं, बशर्ते पार्टी उन्हें समर्थन दे। अगर वह इस भूमिका से हट जाएँ तो संभावित प्रतिस्पर्धी के बारे में पहले ही अटकलें लग रही हैं।
समाज में उनका प्रभाव सिर्फ संसद तक सीमित नहीं है; उन्होंने कई बार शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में पहल की है। हाल ही में उन्होंने एक शैक्षणिक स्कॉलरशिप योजना का समर्थन किया, जिसमें ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षण के लिये आर्थिक मदद मिलेगी। यह काम उनके सामाजिक योगदान को दर्शाता है।
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आखिरकार, ओम बिड़ला की राजनीति सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि उनके कदमों से भी दिखती है। चाहे वह नई तकनीक अपनाने का हो या संसद के नियम सुधारने का, उनका हर फ़ैसला सीधे जनता को प्रभावित करता है। इसलिए इन खबरों पर ध्यान देना ज़रूरी है – तभी आप देश की दिशा समझ पाएंगे।
एनडीए के उम्मीदवार ओम बिड़ला को बुधवार को लोक सभा का अध्यक्ष चुना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को ध्वनि मत से स्वीकार किया गया। विपक्ष ने अपने उम्मीदवार कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश को प्रस्तावित किया था, लेकिन वे मतों पर जोर नहीं डाल सके। इसके बाद पीएम मोदी और राहुल गांधी दोनों ने ओम बिड़ला को बधाई दी।
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