अगर आप भारतीय त्योहारों में थोड़ा अलग देखना चाहते हैं तो ओडिशा का नाम ज़रूर आएगा। यहाँ के त्यौहारी माहौल, लोक संगीत और स्वादिष्ट खाने का मेल किसी भी यात्रा को यादगार बना देता है। इस लेख में हम सबसे बड़े उत्सवों पर नज़र डालेंगे और बताएंगे कि इन्हें कैसे सही ढंग से मनाएँ.
रथ यात्रा (जगन्नाथ पुरी) – हर साल जूलै में जगन्नाथ मंदिर के रथ पर भगवान विष्णु, बलभद्र और सुन्दरकुण्डा की सवारी होती है। लाखों श्रद्धालु इस भव्य प्रक्रिया को देख आते हैं। रथ का आकार, शोर वाले ढोल-नागाड़े और रंगीन झांकियों से पूरे शहर में उत्सव का माहौल बन जाता है।
राजा पर्ब (रजा पर्ब) – यह तीन दिन चलने वाला त्यौहार बंधुता, धरती माँ के साथ जुड़ाव और महिलाओं की शक्ति को मनाता है। महिलाएं मिट्टी में सजीव बीज बोती हैं, पारंपरिक गाने गाती हैं और विशेष व्यंजन बनाती हैं। इस दौरान घरों की छत पर लाल धागे और पंछी की डाली लगाई जाती है – यही ओडिशा की अनोखी पहचान है.
दुर्गा पूजा – बंगाल के साथ मिलकर ओडिशा में भी दुर्गा माता का पूजन बड़े जोश से किया जाता है। कँपिंग और रिवाजों में थोड़ा अंतर होता है, लेकिन माँ की आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मिठाईयों की भरमार एक जैसी रहती है.
मकर संक्रांति (संतरा) – यहाँ इसे "उटकी" कहते हैं। लोग इस दिन तिल के लड्डू बनाते हैं, धूप में सूखे फलों को सजेते हैं और कुतुब्बी बांस के जामे पर उड़ान भरते हैं. यह उत्सव सूर्य की यात्रा का प्रतीक है और पूरे गाँव में मिठाईयों की खुशबू फैली रहती है.
उडिसा संगीत महोत्सव – यदि आप संगीत प्रेमी हैं तो ओडिशा का लोकसंगीत, पधु और जजरा के साथ होने वाले इस महोत्सव को मिस नहीं कर सकते। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति में ओड़िया भाषा की मिठास सुनाई देती है.
पहले तो अपने यात्रा का प्लान पहले से बनाएं. रथ यात्रा के दौरान प्यूरी में भीड़ बहुत अधिक होती है, इसलिए होटल या गेस्टहाउस जल्दी बुक कर लें। सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट की जगह निजी टैक्सी लेना सुविधाजनक रहता है क्योंकि कई बार रास्ते बंद हो सकते हैं.
ड्रेस को लेकर सावधानी बरतें. ओडिशा में अधिकांश लोग हल्के कपड़े पसंद करते हैं, लेकिन रथ यात्रा के दौरान साफ‑सुथरे कपड़े और टोपी रखना बेहतर रहेगा – धूल और भीड़ से बचाव होगा।
भोजन की बात करें तो दालमा, पखाला (पनीर) और चटपटे साम्बार को आज़माएँ. स्थानीय स्ट्रीट फ़ूड में “डली” (साबूदाना के टॉफी) और “लड़ु” (तिल के लड्डू) बहुत लोकप्रिय हैं। अगर आप शाकाहारी हैं तो भी यहाँ विकल्प भरपूर मिलेंगे.
स्थानीय रीति‑रिवाजों का सम्मान करना जरूरी है. रथ यात्रा में फोटो लेते समय ध्वनि को कम रखें, क्योंकि यह पूजा स्थल की शांति को बिगाड़ सकता है. राजा पर्ब के दौरान महिलाएं घर से बाहर नहीं आतीं – अगर आप महिला हैं तो इस बात का ध्यान रखें.
अंत में, अपने मोबाइल या कैमरे को चार्ज रखिए और बैकअप पावर बैंक साथ ले जाएँ। उत्सव की भीड़ में अक्सर पॉवर कट हो जाता है. कुछ नकद रखना भी फायदेमंद रहेगा क्योंकि कई छोटे दुकाने कार्ड नहीं स्वीकार करतीं.
ओडिशा के ये रंग‑बिरंगे त्यौहार सिर्फ देखने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए हैं। यहाँ की ध्वनि, स्वाद और खुशबू आपको एक नई दुनिया में ले जाएगी. तो अगली बार जब भी आप यात्रा की सोचें, ओडिशा का उत्सव पैकेज चुनिए – यह अनुभव आपके सफ़र को खास बना देगा.
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की 'पहंडी' अनुष्ठान रविवार, 7 जुलाई, 2024 को आरंभ हुआ। परंपरागत रूप से आरती और 'मैलम' अनुष्ठान के बाद, देवताओं को मंदिर के अंदर से बाहर निकाला गया। इसके बाद उनके रथों के लिए भव्य शोभायात्रा शुरू हुई। लाखों श्रद्धालु इस आयोजन को देखने के लिए पुरी पहुंचे।
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