अभी हाल में निपाह वायरस ने कई शहरों में धूम मचा दी है। लोग पूछते हैं – ये बीमारी कैसी है, कब तक चलती है और इससे कैसे बचा जा सकता है? तो चलिए, बिना किसी जटिल शब्दों के सीधे जवाब देते हैं।
सबसे पहले तो इस वायरस की पहचान उसके लक्षणों से होती है। आम तौर पर संक्रमित व्यक्ति को तेज़ बुखार, खांसी, सांस में दर्द और थकान महसूस होती है। कुछ लोगों को उल्टी या दस्त भी हो सकता है, लेकिन ये कम ही देखा गया है। अगर आप इन संकेतों में से दो‑तीन का अनुभव कर रहे हैं तो डॉक्टर के पास जाना बेहतर रहेगा।
अब बात करते हैं बचाव की। सबसे बुनियादी लेकिन अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला तरीका है – हाथ धोना। साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएँ, खासकर बाहर आने‑आने के बाद। साथ ही भीड़भाड़ वाले स्थानों में मास्क पहनें, क्योंकि वायरस हवा के ज़रिए फेलता है।
घर में अगर किसी को निपाह वायरस हो गया है तो कमरे की वेंटिलेशन पर ध्यान दें। खिड़कियां खोल कर ताज़ी हवा अंदर लाएँ और नियमित रूप से सतहों को सैनिटाइज़र से साफ करें। यह छोटे‑छोटे कदम रोग के फैलाव को काफी हद तक कम करते हैं।
खाने-पीने की चीजें भी सावधानी से चुनें। कच्चा या अधपका भोजन न खाएँ, खासकर यदि आप बाहर खाने जा रहे हों। फल और सब्ज़ियों को अच्छी तरह धो कर ही खाएँ, क्योंकि सतहों पर वायरस रह सकता है।
अगर आपके पास घर में कोई बुजुर्ग या रोग प्रतिरोधक क्षमता कम वाला सदस्य है तो उसकी देखभाल में अतिरिक्त सावधानी बरतें। उनके लिए अलग रूम रखना और खाने‑पीने की चीज़ें अलग से तैयार करना एक समझदारी भरा कदम होगा।
वैक्सीनेशन के बारे में अभी तक निपाह वायरस का कोई विशेष टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन डॉक्टर अक्सर फ्लू वैक्सीन या अन्य सामान्य इम्यून बूस्टर्स लेने की सलाह देते हैं। यह शरीर को वायरस से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।
अगर आप पहले से ही संक्रमित हैं तो आराम करें, भरपूर पानी पिएँ और डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाइयाँ लें। हल्का-फुल्का व्यायाम करने से भी शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, लेकिन अत्यधिक थकावट से बचें।
आख़िर में इतना ही – निपाह वायरस को लेकर डरना नहीं चाहिए, बस सही जानकारी और सावधानी के साथ इसे नियंत्रित किया जा सकता है। याद रखें, स्वस्थ रहने की कुंजी छोटी‑छोटी आदतों में छुपी होती है। यदि आप इन सुझावों का पालन करेंगे तो इस बीमारी से बचाव आसान हो जाएगा।
केरल के मलप्पुरम में 24 साल के छात्र की निपाह वायरस से मौत, इस वर्ष की दूसरी घटना। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार छात्र बेंगलुरु से आया था और 4 सितंबर को बुखार आने के बाद उसकी तबियत बिगड़ रही। वायरस की पुष्टि पुणे के वायरोलॉजी संस्थान में खून की जांच के बाद हुई। इसके मद्देनज़र 151 लोग निगरानी में हैं और पांच अन्य व्यक्तियों के नमूनों की जांच की जा रही है।
©2025 iipt.co.in. सर्वाधिकार सुरक्षित