अगर आप भारत के उत्तर‑पूर्व में कोई ऐसा खेल देखना चाहते हैं जो प्रकृति, परम्परा और एथलेटिक क्षमता को जोड़ता हो, तो खासी हिल्स की तीरंदाज़ी से बेहतर कुछ नहीं है। यह न केवल स्थानीय लोगों का गर्व है, बल्कि विदेशियों को भी आकर्षित करता है क्योंकि यहाँ के तीरंदाज़ों की शैली अनोखी है।
खासी समुदाय ने शिकार और युद्ध दोनों के लिए तीर‑धनुष का इस्तेमाल सदियों से किया है। पुरानी कहानियों में कहा जाता है कि बुजुर्गों ने अपने बच्चों को छोटा‑छोटा धंधे की जगह इस कला सिखाई, इसलिए आज भी गाँव में हर बच्चा बचपन में ही धनुष उठाता है। पहले यह काम सिर्फ रिवाज था, पर धीरे‑धीरे इसे प्रतियोगिता में बदल दिया गया।
१९६० के दशक में सरकारी खेल विभाग ने इन पारंपरिक तीरंदाज़ों को पहचानना शुरू किया और कुछ गाँवों में आधुनिकीकरण की सुविधा दी। इस कारण से खासी हिल्स अब राष्ट्रीय स्तर पर कई एर्चरी प्रतियोगिताओं का मेज़बान बन गया है।
आज शिमला‑सिविक जैसे बड़े शहरों से भी खिलाड़ी यहाँ के विशेष कोर्स में भाग लेते हैं। सबसे लोकप्रिय इवेंट ‘खासी हिल्स आर्चरी फेस्ट’ हर साल मई‑जून में आयोजित होता है, जिसमें राज्य और देश भर के तीरंदाज़ शामिल होते हैं। इस मेले में केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि धनुष निर्माण की वर्कशॉप, स्थानीय भोजन का स्टॉल और संगीत भी मिलते हैं।
यदि आप शुरुआती हैं, तो सबसे नजदीकी प्रशिक्षण केंद्र ‘सिंगीर्फोर्ट एर्चरी अकादमी’ है। यहाँ अनुभवी कोच धारणीय धनुष, सही पकड़ और लक्ष्य पर फोकस कैसे रखें सिखाते हैं। कक्षा छोटे‑बड़े समूह में चलती है, इसलिए आप अपनी गति के अनुसार सीख सकते हैं।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि खासी हिल्स की हवा ठंडी और तेज़ होती है, जिससे तीर की दिशा बदल सकती है। इस कारण स्थानीय खिलाड़ी हमेशा पवन को पढ़ने का अभ्यास करते हैं। आप भी जब यहाँ पहली बार शूट करेंगे तो पहले कुछ प्रैक्टिस शॉट्स के साथ मौसम को समझें।
साथ ही, पारंपरिक सामग्री जैसे बांस और चमड़े की थ्रेड अभी भी लोकप्रिय है क्योंकि ये हल्की होती हैं और स्थानीय जलवायु में बेहतर टिकती हैं। लेकिन यदि आप प्रतियोगिता स्तर पर जाना चाहते हैं तो कार्बन फाइबर वाले धनुष का उपयोग करना सुविधाजनक रहेगा।
खासी हिल्स के तीरंदाज़ी क्लब अक्सर मुफ्त प्रशिक्षण सत्र देते हैं, खासकर स्कूलों के बच्चों को आकर्षित करने के लिए। अगर आप अपने बच्चे को इस खेल में रुचि दिलाना चाहते हैं तो स्थानीय स्कूल से संपर्क करके इन सत्रों का फायदा ले सकते हैं।
खासी हिल्स की यात्रा सिर्फ तीरंदाज़ी नहीं, बल्कि संस्कृति का भी अनुभव है। यहाँ के लोग पारंपरिक नृत्य और गीत गाते हुए धान के खेत में काम करते हैं। आप जब प्रतियोगिता देख रहे हों, तो आसपास के बाग़ों से ताजा जामुन या काजू खा सकते हैं – यह एक असली स्थानीय स्वाद देगा।
अगर आप इस क्षेत्र में आर्करी टूर प्लान कर रहे हैं, तो बेहतर होगा कि पहले मौसम की जानकारी ले लें। बरसात के महीने में रास्ते फिसलन वाले हो जाते हैं और पवन तेज़ होता है, जिससे शूटिंग मुश्किल हो सकती है। अक्टूबर‑नवंबर का समय सबसे अनुकूल माना जाता है।
खासी हिल्स की तीरंदाज़ी को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने कई योजनाएँ शुरू की हैं। इनमें फंडेड शौकिया क्लब, नई बारीकी वाले लक्ष्य बोर्ड और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेले आयोजित करने की योजना शामिल है। इससे भविष्य में यहाँ से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में चयनित हो सकते हैं।
संक्षेप में कहें तो खासी हिल्स आर्चरी सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि जीवनशैली है। चाहे आप प्रोफेशनल तीरंदाज़ बनना चाहते हों या बस एक नया अनुभव ढूंढ रहे हों, यहाँ हर कोई आपका स्वागत करेगा। अब देर किस बात की? अपनी यात्रा योजना बनाइए और इस पहाड़ी धुंधली हवा में लक्ष्य को मारने का मज़ा लीजिए।
Shillong Morning Teer के 27 दिसंबर 2024 के परिणाम जारी हो गए हैं। पहले राउंड में 89 और दूसरे राउंड में 97 का नंबर निकला। ये लॉटरी मेघालय में आर्चरी को बढ़ावा देने के लिए आयोजित होती है और बड़ी संख्या में युवा इसमें हिस्सा लेते हैं।
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