आपने कभी सोचा है कि कैंसर का इलाज नहीं हो पाता तो आखिर क्यों लोग जल्दी‑जल्दी मरते हैं? दरअसल, कई बार बीमारी बहुत देर तक पकड़े रहती है, या सही समय पर जांच नहीं होती। इस लेख में हम बात करेंगे प्रमुख कारणों की, शुरुआती संकेतों की और सबसे जरूरी बचाव उपायों की – सब कुछ आसान भाषा में ताकि आप तुरंत समझ सकें और कार्रवाई कर सकें।
कैंसर कई वजहों से शुरू हो सकता है: धूम्रपान, शराब, अस्वस्थ भोजन, आनुवांशिक बदलाव या पर्यावरणीय प्रदूषण। अगर आप रोज़ाना तंबाकू लेते हैं तो फेफड़ों, मुंह और गले में कैंसर का जोखिम दो‑तीन गुना बढ़ जाता है। इसी तरह अधिक तेलिया खाना और शारीरिक निष्क्रियता मोटा शरीर बनाती है, जिससे पेट, ब्रेस्ट या कोलन कैंसर की संभावना बढ़ती है।
शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, इसलिए नजरअंदाज करना आसान होता है। लगातार खांसी जो कई हफ्तों तक नहीं रुकती, अनजाने में वजन घटना, त्वचा पर नई दाने या नॉन‑हेलिंग घाव – इन सबको गंभीरता से लेना चाहिए। यदि कोई हिस्सा दर्द‑मुक्त लेकिन धीरे‑धीरे बड़ा हो रहा है, तो डॉक्टर को दिखाना ही बेहतर है। याद रखिए: कैंसर का शुरुआती पता चलने पर इलाज के विकल्प ज्यादा होते हैं और जीवन बचाने की संभावना भी बढ़ जाती है।
पहला कदम है अपनी दिनचर्या में छोटे‑छोटे बदलाव लाना। धूम्रपान छोड़ें, शराब कम करें और फलों‑सब्जियों को थाली का आधा भाग बनाएं। हर रोज़ 30 मिनट तेज चलना या साइकिल चलाना न सिर्फ वजन नियंत्रित रखता है, बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति भी बढ़ाता है। साथ ही साल में एक बार पूरी जांच कराएँ – ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और जहाँ ज़रूरत हो, एंपीसीटी या एमआरआई जैसी इमेजिंग करवाएं। ये खर्चीला लग सकता है, पर कई सरकारी अस्पतालों में मुफ्त स्क्रीनिंग उपलब्ध है; ऑनलाइन खोजें ‘कैंसर स्क्रीनिंग नि:शुल्क’ और पास के सेंटर का पता निकालें।
दूसरा महत्वपूर्ण कदम है जागरूकता फैलाना। अपने परिवार या दोस्तों को उन लक्षणों के बारे में बताएं जो आपने पढ़े हैं, ताकि किसी भी बदलाव पर जल्दी प्रतिक्रिया हो सके। अगर आप कोई सामाजिक समूह चलाते हैं तो कैंसर बचाव दिवस (फ़ेब्रवरी 4) जैसे इवेंट्स का आयोजन कर सकते हैं – इससे लोगों को स्क्रीनिंग करवाने की प्रेरणा मिलती है।
अगर आपको या आपके किसी परिचित को कैंसर निदान मिला है, तो अकेले मत रहिए। राष्ट्रीय ट्यूमर बोर्ड (एनटीबी), कैंसर रोगी सहायता समूह और विभिन्न NGOs मुफ्त काउंसलिंग, दवा में सहायत और वित्तीय समर्थन देते हैं। इन संस्थाओं के संपर्क नंबर वेबसाइट पर या 1800‑123‑4567 जैसे हेल्पलाइन से मिल सकते हैं। याद रखें, इलाज केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि सामाजिक सहयोग भी है।
अंत में एक बात ज़रूर कहूँ: कैंसर से निधन का डर वास्तविक है, पर इसे रोकने के लिए हमारे पास कई साधन हैं। सही जानकारी, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप अपने या अपने प्रियजनों की उम्र बढ़ा सकते हैं। तो अगली बार जब कोई नया लक्षण दिखे, तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ – यही सबसे बड़ा बचाव कदम है।
अतुल परचुरे, जिनका मराठी और बॉलीवुड में बड़ा योगदान था, का निधन 14 अक्टूबर 2024 को 57 वर्ष की आयु में हो गया। वे कई वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे और काम के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। वे अपनी कॉमिक टाइमिंग और अभिनय की बहुआयामी भूमिका के लिए मशहूर थे। उनके निधन पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शोक प्रकट किया।
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