जब हम हिंदू देवताओं के बारे में बात करते हैं तो तीन मुख्य देवता याद आते हैं – ब्रह्मा, विष्णु और शिव. इनमें से विष्णु को अक्सर ‘रक्षक’ कहा जाता है क्योंकि वह सृष्टि को बचाने का काम करता है। आप शायद सुनते हों कि विष्णु जी ने कई बार धरती पर अवतार लिये, लेकिन उनका असली मतलब क्या है? इस लेख में हम सरल शब्दों में समझेंगे कि भगवान विष्णु कौन हैं, उनके प्रमुख अवतार कौन‑कौन से हैं और उनकी पूजा कैसे की जाती है।
हिंदू ग्रंथों में कहा गया है कि विष्णु ने सात मुख्य (दश) अवतार लिये, जिनमें सबसे ज्यादा बताया जाता है राम और कृष्ण. ये दोनो ही भगवान की अलग‑अलग भूमिका दिखाते हैं – राम न्याय के प्रतीक हैं और कृष्ण प्रेम व ज्ञान के। अन्य अवतार जैसे मत्स्य (मछली), वराह (साँडभेड़) और नृसिंह (आधा आदमी आधा सिंह) भी बहुत रोचक कहानियों से भरे हुए हैं। इन सबका एक ही मकसद है – जब बुराई बढ़ती है, तो विष्णु अपने रूप बदल कर उसे रोकते हैं.
इन कथाओं को सुनकर अक्सर लोग पूछते हैं, "क्या ये वास्तविक इतिहास है?" उत्तर सरल है: यहाँ इतिहास और आध्यात्मिक सीख दोनों साथ चलते हैं. कहानी का मकसद हमें सही मार्ग दिखाना है, न कि सिर्फ पुरानी मिथक बताना.
अगर आप विष्णु की आराधना करना चाहते हैं तो बहुत जटिल रीत‑रिवाज नहीं चाहिए. सबसे पहले घर में एक साफ़ जगह बनाकर उसके मध्य में एक छोटा सा भगवान का चित्र या मूर्ति रखें. रोज़ सुबह स्नान करके, कपड़े बदलकर, पानी और फूल अर्पित करें. विष्णु जी के 8 स्वरूप हैं – शंकर (शिव), काली आदि – लेकिन सामान्य पूजा में आप बस “ओम् नमो भगवते वासुदेवे” मंत्र दोहराएँ.
एक विशेष बात यह है कि विष्णु जी को ‘प्रभात’ और ‘संध्या’ समय पर याद करना फायदेमंद माना जाता है. इस दौरान हल्का प्रसाद जैसे फल या चावल का दाना अर्पित कर सकते हैं. आप चाहें तो उनके प्रमुख अवतारों – राम या कृष्ण – के विशेष स्तोत्र भी पढ़ सकते हैं.
भक्तियों को अक्सर यह सलाह दी जाती है कि विष्णु जी की पूजा में सच्ची भावना हो, शब्दों से ज्यादा दिल का इरादा मायने रखता है. इसलिए जब आप मंत्र दोहराएँ तो मन को शांत रखें और भगवान के प्रति अपना प्यार महसूस करें.
आजकल कई लोग सोशल मीडिया पर विष्णु की कहानियां शेयर करते हैं, लेकिन वास्तविक लाभ पाने के लिए रोज़मर्रा की जिंदगी में छोटे‑छोटे कार्यों से शुरू करें – जैसे ईमानदारी, मदद करना या पर्यावरण को बचाना. यही वह ‘धर्म’ है जिसे विष्णु जी हमेशा चाहते रहे हैं.
संक्षेप में कहा जाए तो भगवान विष्णु न केवल एक धार्मिक प्रतीक हैं बल्कि जीवन के कठिन दौर में हमें सही दिशा दिखाने वाले मित्र भी हैं. उनकी कहानियां, अवतार और पूजा विधि सभी को आसान तरीके से समझ आती है. आप जब अगली बार किसी चुनौती का सामना करें, तो याद रखें कि विष्णु जी ने कई बार बुराई को हराया है – आपका संघर्ष भी जरूर जीत में बदलेगा.
देव उठनी एकादशी 2024 का पर्व 12 नवंबर को मनाया जाएगा, जब भगवान विष्णु अपने चार महीने के योग निद्रा से जागते हैं। इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है क्योंकि यह शुभ और वैवाहिक गतिविधियों की शुरुआत का संकेत देता है। भक्त परंपरागत गीत गाकर भगवानों को जागरूक करते हैं और तुलसी-शालिग्राम का विवाह अगले दिन संपन्न होता है।
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