जब हम हिन्दू कैलेंडर देखते हैं, तो अक्सर शब्द "पुण्यतिथि" दिखता है। साधारण भाषा में इसका मतलब है वो तिथि जो किसी बड़े संत, गुरु या पवित्र व्यक्ति की जन्म या मृत्यु से जुड़ी होती है। इस दिन को आमतौर पर उपवास, पूजा या दान‑धर्म करके मनाया जाता है। कई बार यह तिथियाँ परिवार के लिए विशेष महत्व रखती हैं क्योंकि इनका जश्न हमारे पूर्वजों की याद दिलाता है।
हिन्दू पंचांग में हर दिन को सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों से जोड़ा जाता है। जब किसी संत या देवता के जीवन‑काल का उल्लेख मिलता है, तो उस दिन को "पुण्य" टैग दिया जाता है। इस तिथि को जानने के दो आसान तरीके हैं: पहला, स्थानीय मंदिर या पंडित से पूछें; दूसरा, ऑनलाइन पंचांग में नाम खोजकर तारीख देख लें। अक्सर ये तिथियाँ ग्रेगरियन कैलेंडर की तुलना में एक‑दो दिन पीछे या आगे हो सकती हैं, इसलिए आध्यात्मिक कैलेंडर को देखना ज़रूरी है।
हर पुण्यतिथि पर कुछ विशेष क्रियाएँ की जाती हैं। सबसे पहला कदम है उपवास – कई लोग दिन भर बिना भोजन या हल्का फल‑भोजन लेकर रखे रहते हैं। फिर मंदिर में जाके भगवान को जल चढ़ाते हैं, अगर संभव हो तो उस संत की प्रतिमा के सामने बैठकर कथा सुनते हैं। दान भी एक बड़ा हिस्सा है; गरीबों को खाना देना, कपड़े बांटना या किसी चैरिटी को सहयोग देना इस दिन का मुख्य उद्देश्य माना जाता है। कुछ परिवार में विशेष रिवाज होते हैं जैसे घर में दीप जलाकर, व्रत‑भोजन तैयार कर सभी को बाँटना।
पुण्यतिथि के अवसर पर कई लोग अपने पूर्वजों की याद में स्मृति‑स्थल (श्मशान) भी जाते हैं और फूल रखकर सम्मान दिखाते हैं। यह एक साधारण लेकिन प्रभावी तरीका है अपनी जड़ों से जुड़ने का, जिससे मन को शांति मिलती है।
अगर आप पहली बार पुण्यतिथि मनाने जा रहे हैं, तो सबसे आसान बात है स्थानीय मंदिर में पूछना या ऑनलाइन पंचांग देखना। वहाँ के पुजारी अक्सर तिथियों की सही जानकारी और छोटे‑छोटे रिवाज बता देते हैं। साथ ही, परिवार के बड़े बुज़ुर्गों से भी पूछें; वे आमतौर पर इस बारे में बहुत कुछ जानते हैं।
आखिरकार, पुण्यतिथि सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि हमारे सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। इसे सही समझकर और सादे तरीके से मनाकर हम न केवल अपने आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध बनाते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक ऊर्जा फैला सकते हैं। तो अगली बार जब कैलेंडर में "पुण्यतिथि" दिखे, तो उसे एक मौका मानें – थोड़ा समय निकालें, कुछ अच्छा करें और इस दिन का सही अर्थ समझें।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर उनके बेटे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दोनों की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए एक भावुक संदेश लिखा। राहुल गांधी ने अपने पिता के साथ एक राजनीतिक यात्रा पर अपनी बचपन की एक तस्वीर पोस्ट की।
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